स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ अव्वल, शहरों की हवा सुधारने की दौड़ तेज

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ अव्वल, शहरों की हवा सुधारने की दौड़ तेज

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 7 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर 5वें स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए। इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत शहरों और पहली बार नगर वार्डों के प्रदर्शन को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य देश के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण घटाने के प्रयासों को प्रोत्साहन देना है।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का ढांचा क्या है

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम से जुड़ा मूल्यांकन तंत्र है, जिसकी शुरुआत 2019 में भारतीय शहरों की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए की गई थी। इसमें शहरों के प्रदूषण नियंत्रण उपाय, निगरानी व्यवस्था और स्वच्छ वायु कार्ययोजनाओं के क्रियान्वयन का आकलन किया जाता है। यह पहल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय के समन्वय से संचालित होती है।

इस बार शहरों को जनसंख्या के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर Category 1, 3 लाख से 10 लाख आबादी वाले शहर Category 2 और 3 लाख से कम आबादी वाले शहर Category 3 में रखे गए। इस व्यवस्था से अलग-अलग आकार के शहरों की तुलना एक समान मानकों पर की जा सकती है।

किस शहर ने मारी बाजी

Category 1 में लखनऊ ने 200 में से 198 अंक हासिल कर पहला स्थान पाया और उसे 1.5 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार मिला। इसी श्रेणी में इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर रहे। Category 2 में राउरकेला ने 198.5 अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। Category 3 में कलिंग नगर पहले स्थान पर रहा।

इस वर्ष की एक बड़ी खासियत यह रही कि नगर वार्डों को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया। 30,000 से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में लखनऊ का वार्ड 70 पहले स्थान पर रहा, जबकि भोपाल का वार्ड 60 और नासिक का वार्ड 7 क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। राज्य और केंद्रशासित प्रदेश स्तर के वार्ड पुरस्कारों में जम्मू नगर निगम ने तीनों जनसंख्या-आधारित श्रेणियों में पहचान बनाई और कुल 50 लाख रुपये का पुरस्कार प्राप्त किया।

हवा की गुणवत्ता में सुधार के संकेत

कार्यक्रम में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत निगरानी में शामिल 130 शहरों में से 108 शहरों ने 2017-18 के आधार वर्ष की तुलना में 2025-26 तक PM10 स्तर में सुधार दर्ज किया। PM10 उन सूक्ष्म कणों को कहा जाता है जिनका वायुगतिकीय व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये कण श्वसन तंत्र पर असर डालते हैं और वायु प्रदूषण के प्रमुख संकेतकों में गिने जाते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • स्वच्छ वायु दिवस हर साल 7 सितंबर को मनाया जाता है।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की शुरुआत भारत सरकार ने 2019 में की थी।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • PM10 वायु में मौजूद 10 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कणों को दर्शाता है।

इस पुरस्कार सूची से साफ है कि शहरों में वायु प्रदूषण नियंत्रण अब केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि प्रदर्शन-आधारित प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में निगरानी, क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर की भागीदारी ही स्वच्छ हवा की दिशा तय करेगी।

Originally written on September 8, 2026 and last modified on September 8, 2026.

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