अग्निकुल की नई टेस्टिंग सुविधाएं भारत के रीयूजेबल रॉकेट मिशन को मजबूती देंगी
चेन्नई स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस ने 8 सितंबर 2026 को अपने असेंबली और टेस्टिंग परिसर में दो नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें Stage Testing & Inspection Facility (STIF) और Pressurant Tank Realisation, Over-wrapping and Outfitting Facility (PROOF) शामिल हैं। इन दोनों इकाइयों का उद्देश्य रॉकेट हार्डवेयर की जांच, पुनःप्रमाणीकरण और महत्वपूर्ण पुर्जों के स्वदेशी निर्माण को मजबूत करना है।
रॉकेट स्टेज की जांच के लिए STIF
STIF को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें एकीकृत प्रोपल्शन और एवियोनिक्स वाले पूरे रॉकेट स्टेज का परीक्षण किया जा सके। यह सुविधा 1 kN से 200 kN तक के थ्रस्ट स्तरों को सपोर्ट करती है और तरल ऑक्सीजन यानी LOX को 73 केल्विन तक सब-कूल करने की क्षमता रखती है। इसके अलावा, यहां 150 सेकंड तक के पूर्ण अवधि वाले रॉकेट इंजन बर्न का परीक्षण भी संभव है।
यह सुविधा खास तौर पर उड़ान के बाद वापस आए रॉकेट स्टेज की जांच और पुनःयोग्यता सुनिश्चित करने के लिए उपयोगी होगी। रीयूजेबल रॉकेट सिस्टम में यह चरण बेहद अहम होता है, क्योंकि हर उड़ान के बाद हार्डवेयर की स्थिति का आकलन कर उसे दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है।
प्रेशर टैंक निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा
दूसरी सुविधा PROOF है, जिसका उपयोग हाई-प्रेशर कंपोजिट ओवरव्रैप्ड प्रेशर वेसल्स के इन-हाउस निर्माण के लिए किया जाएगा। ये हल्के लेकिन मजबूत प्रेशर कंटेनर होते हैं, जिनमें अंदर लाइनर या धातु कोर के ऊपर कंपोजिट परत चढ़ाई जाती है।
रॉकेट प्रणालियों में प्रेशर टैंक गैसों को उच्च दाब पर संग्रहित करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। ये प्रणोदन और स्टेज नियंत्रण जैसी अहम प्रणालियों का हिस्सा होते हैं। PROOF के शुरू होने से ऐसे महत्वपूर्ण घटकों के लिए बाहरी विक्रेताओं पर निर्भरता कम होगी और निर्माण प्रक्रिया अधिक नियंत्रित व विश्वसनीय बन सकेगी।
मिशन-02 और भारत के रीयूजेबल रॉकेट लक्ष्य
यह नई अवसंरचना अग्निकुल कॉसमॉस के Mission-02 को समर्थन देगी, जिसका लक्ष्य भारत के पहले ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट बूस्टर की रिकवरी हासिल करना है। ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट वे प्रक्षेपण यान होते हैं जो पेलोड को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम होते हैं।
रीयूजेबल रॉकेट विकास में सामान्यतः build, test, fly, recover, inspect, and fly-again का चक्र अपनाया जाता है। ऐसे सिस्टम में बार-बार परीक्षण, उड़ान के बाद निरीक्षण और उड़ान-योग्य हार्डवेयर का दोबारा निर्माण आवश्यक होता है। इसी वजह से STIF और PROOF जैसी सुविधाएं इस तकनीक के लिए आधारभूत महत्व रखती हैं। उद्घाटन के समय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी मौजूद थे, जो भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन कार्यक्रम से जुड़े हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अग्निकुल कॉसमॉस चेन्नई आधारित स्पेस-टेक स्टार्टअप है, जो छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान विकास से जुड़ा है।
- LOX का पूरा नाम Liquid Oxygen है और यह रॉकेट प्रणोदन में एक सामान्य ऑक्सिडाइज़र है।
- Composite Overwrapped Pressure Vessels का उपयोग एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में उच्च दाब गैस भंडारण के लिए किया जाता है।
- गगनयान भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसे इसरो विकसित कर रहा है।
इन दोनों सुविधाओं के साथ अग्निकुल कॉसमॉस ने रॉकेट परीक्षण, निरीक्षण और पुर्जों के निर्माण की अपनी क्षमता को एक नए स्तर पर पहुंचाया है। यह कदम भारत में रीयूजेबल लॉन्च सिस्टम और निजी अंतरिक्ष तकनीक के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।