भारत-जापान वन सहयोग में नई रूपरेखा, 2027-31 रोडमैप पर सहमति

भारत-जापान वन सहयोग में नई रूपरेखा, 2027-31 रोडमैप पर सहमति

भारत और जापान के बीच वन क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने के लिए बेंगलुरु में 7वीं संयुक्त कार्य समूह बैठक आयोजित की गई। 8 सितंबर 2026 को हुई इस बैठक में तकनीकी सहयोग, संसाधन प्रबंधन और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने 2027-2031 के रोडमैप को भी मंजूरी दी, जिससे वन अनुसंधान और प्रबंधन के क्षेत्र में साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।

बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अपर महानिदेशक (वन) श्री रमेश कुमार पांडेय ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जापान की कृषि, वानिकी और मत्स्य मंत्रालय के अंतर्गत फॉरेस्ट्री एजेंसी के उप महानिदेशक श्री शिमिजु कोटारो ने किया। बैठक में विशेष रूप से ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट्स, फॉरेस्ट जेनेटिक्स और फॉरेस्ट स्टॉक जैसे विषयों पर तकनीकी सहयोग पर जोर दिया गया।

ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट्स का अर्थ उन पेड़ों से है जो जंगलों के बाहर खेतों, मेड़, घरों के आसपास, सड़कों के किनारे और अन्य गैर-वन क्षेत्रों में उगते हैं। यह अवधारणा कृषि-वानिकी, शहरी हरियाली और लकड़ी संसाधन प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारत-जापान वन सहयोग का ढांचा

भारत और जापान के बीच वन सहयोग की संयुक्त कार्य समूह व्यवस्था 2015 में हस्ताक्षरित एक मेमोरेंडम ऑफ कोऑपरेशन के तहत काम करती है। इसी ढांचे के जरिए दोनों देश वन विज्ञान, तकनीकी आदान-प्रदान और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन पर सहयोग बढ़ाते हैं। इस तरह की बैठकें नीतिगत समन्वय के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सहयोग को भी आगे बढ़ाती हैं।

इस बार की बैठक का एक अहम परिणाम 2027-2031 के लिए रोडमैप पर सहमति रहा। इससे आने वाले वर्षों में संयुक्त परियोजनाओं, शोध सहयोग और क्षमता निर्माण की दिशा स्पष्ट होती है। बैठक के अंत में 7वीं संयुक्त कार्य समूह बैठक के मिनट्स पर हस्ताक्षर किए गए और बेंगलुरु स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी का दौरा भी किया गया।

कर्नाटक में फील्ड विजिट और संरक्षण पर फोकस

बिलateral कार्यक्रम के तहत 9 सितंबर 2026 को मैसूर में चंदन आधारित कृषि-वानिकी फार्म, चंदन डिपो और एक प्रसंस्करण इकाई का दौरा भी शामिल था। इसके बाद 10 सितंबर 2026 को नगरहोल टाइगर रिजर्व के लिए फील्ड ट्रिप प्रस्तावित थी, ताकि वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन के अनुभवों का आदान-प्रदान किया जा सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में वन नीति से जुड़ा नोडल मंत्रालय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय है।
  • जापान की फॉरेस्ट्री एजेंसी उसके कृषि, वानिकी और मत्स्य मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है।
  • ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट्स कृषि-वानिकी और शहरी वृक्ष प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाली मान्य अवधारणा है।
  • नगरहोल टाइगर रिजर्व कर्नाटक में स्थित है और नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है।

यह बैठक भारत-जापान संबंधों में पर्यावरणीय सहयोग की निरंतरता को दिखाती है। वन अनुसंधान, संसाधन प्रबंधन और संरक्षण के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी आने वाले वर्षों में और व्यावहारिक रूप ले सकती है।

Originally written on September 9, 2026 and last modified on September 9, 2026.

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