भारत-नॉर्वे संबंधों को मिला ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा
भारत और नॉर्वे ने 18 मई 2026 को ओस्लो में अपने द्विपक्षीय संबंधों को “ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के स्तर तक पहुंचा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के बीच हुई वार्ता के दौरान यह महत्वपूर्ण घोषणा की गई। इस नई साझेदारी का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य, अंतरिक्ष सहयोग और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करना है।
भारत-नॉर्वे संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और नॉर्वे के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1947 में स्थापित हुए थे। दोनों देश लंबे समय से समुद्री मामलों, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और विकास परियोजनाओं में सहयोग करते रहे हैं। नॉर्वे उत्तरी यूरोप का एक प्रमुख नॉर्डिक देश है, जबकि भारत हिंद-प्रशांत महासागर पहल का सदस्य है। समय के साथ दोनों देशों ने हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा दी है, जिससे अब यह संबंध रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच गया है।
ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का महत्व
ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप दो देशों के बीच दीर्घकालिक और संरचित सहयोग का औपचारिक ढांचा होती है। भारत और नॉर्वे के बीच यह साझेदारी हरित नौवहन, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल विकास और समुद्र आधारित सतत आर्थिक गतिविधियों पर केंद्रित है। वर्ष 2025 में दोनों देशों ने “इंडिया-नॉर्वे ग्रीन मैरीटाइम पार्टनरशिप” पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य समुद्री परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाना, जहाजरानी क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करना और ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर विकसित करना है।
हरित ऊर्जा और समुद्री सहयोग
नई साझेदारी में ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया ईंधन आधारित प्रणोदन प्रणाली और हरित बंदरगाह अवसंरचना जैसे विषय भी शामिल हैं। यह सहयोग वैश्विक समुद्री क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नॉर्वे ने 18 मई 2026 को भारत की इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में भी शामिल होने की घोषणा की। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग और रणनीतिक समन्वय को मजबूती मिलेगी।
व्यापार और अंतरिक्ष सहयोग
भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ था। इस समझौते में नॉर्वे भी शामिल है। इसके तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। ओस्लो यात्रा के दौरान स्वास्थ्य, डिजिटल अवसंरचना और अंतरिक्ष सहयोग से जुड़े तीन सरकारी समझौता ज्ञापनों की भी उम्मीद जताई गई। इसके अलावा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और नॉर्वेजियन स्पेस एजेंसी के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव की शुरुआत भारत ने वर्ष 2019 में की थी।
- ब्लू इकोनॉमी का संबंध समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग से है।
- यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ में आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं।
- ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया को भविष्य के स्वच्छ समुद्री ईंधन के रूप में देखा जा रहा है।
भारत और नॉर्वे के बीच यह नई ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप वैश्विक स्तर पर सतत विकास और हरित प्रौद्योगिकी सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है। इससे दोनों देशों के आर्थिक, समुद्री और तकनीकी संबंधों को नई गति मिलने की संभावना है।