टेक्सटाइल पीएलआई योजना के तीसरे चरण में 22 नए आवेदकों को मंजूरी
केंद्र सरकार ने 10 जून 2026 को वस्त्र क्षेत्र के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तीसरे चरण के तहत 22 नए आवेदकों को मंजूरी प्रदान की है। इन स्वीकृत कंपनियों ने कुल 2,339.14 करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया है और अधिसूचित वस्त्र उत्पादों से 15,561.34 करोड़ रुपये का कारोबार करने का अनुमान लगाया गया है। यह कदम भारत के वस्त्र उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टेक्सटाइल पीएलआई योजना क्या है?
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना वस्त्र क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य उच्च मूल्य वाले वस्त्र उत्पादों के उत्पादन को प्रोत्साहित करना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है। यह योजना विशेष रूप से मूल्य संवर्धित वस्त्र उत्पादों को कवर करती है, जिनमें मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) परिधान, मानव निर्मित फाइबर कपड़े तथा तकनीकी वस्त्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों को भविष्य में उच्च विकास क्षमता वाला माना जाता है।
तीसरे चरण की प्रमुख उपलब्धियां
नवीनतम मंजूरी के बाद टेक्सटाइल पीएलआई योजना के तीसरे चरण में कुल 96 कंपनियों का चयन हो चुका है। इन कंपनियों ने संयुक्त रूप से 12,822.67 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। सरकारी अनुमान के अनुसार इन परियोजनाओं से लगभग 58,294.18 करोड़ रुपये का कारोबार उत्पन्न होगा। इससे वस्त्र उद्योग में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और निर्यात प्रतिस्पर्धा को भी मजबूती मिलेगी।
रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा
स्वीकृत 22 नए आवेदकों से वस्त्र मूल्य श्रृंखला में लगभग 36,217 नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। वस्त्र उद्योग भारत के सबसे बड़े श्रम-प्रधान क्षेत्रों में से एक है और बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है। इस निवेश से उत्पादन इकाइयों के विस्तार, नई तकनीकों के उपयोग और सहायक उद्योगों के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की संभावना है।
मानव निर्मित फाइबर और तकनीकी वस्त्रों पर जोर
स्वीकृत कंपनियां मुख्य रूप से मानव निर्मित फाइबर आधारित परिधान, एमएमएफ कपड़े और तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में कार्यरत हैं। मानव निर्मित फाइबर वस्त्रों में सिंथेटिक तथा पुनर्निर्मित रेशों से बने उत्पाद शामिल होते हैं। वहीं तकनीकी वस्त्र ऐसे विशेष कपड़े होते हैं जिनका उपयोग केवल पहनने के लिए नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, परिवहन और रक्षा जैसे क्षेत्रों में कार्यात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। वैश्विक स्तर पर तकनीकी वस्त्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
योजना के उद्देश्य और महत्व
टेक्सटाइल पीएलआई योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करना, भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है। इसके माध्यम से वस्त्र आपूर्ति श्रृंखला में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप देश में उन्नत विनिर्माण क्षमताओं के विकास और निर्यात वृद्धि को भी समर्थन प्रदान करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना अतिरिक्त उत्पादन के आधार पर प्रोत्साहन प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की योजना है।
- वस्त्र उद्योग भारत के सबसे बड़े श्रम-प्रधान क्षेत्रों में से एक माना जाता है।
- मानव निर्मित फाइबर वस्त्रों में सिंथेटिक और पुनर्निर्मित रेशों से बने उत्पाद शामिल होते हैं।
- तकनीकी वस्त्रों का उपयोग स्वास्थ्य, कृषि, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष कार्यों के लिए किया जाता है।
टेक्सटाइल पीएलआई योजना के तीसरे चरण में नए आवेदकों की मंजूरी भारत के वस्त्र उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे निवेश, उत्पादन और रोजगार में वृद्धि होगी तथा भारत को वैश्विक वस्त्र और तकनीकी वस्त्र विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।