भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई गति, जेजू फोरम 2026 में एस. जयशंकर ने रखीं वैश्विक सहयोग की पांच प्राथमिकताएं

भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई गति, जेजू फोरम 2026 में एस. जयशंकर ने रखीं वैश्विक सहयोग की पांच प्राथमिकताएं

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 जून 2026 को दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप में आयोजित जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी 2026 में मुख्य वक्तव्य दिया। इससे पहले 24 जून को सियोल में उन्होंने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दो दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक भारत और दक्षिण कोरिया के बीच तेजी से बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों का महत्व

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच वर्ष 1973 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। समय के साथ दोनों देशों के संबंध व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और औद्योगिक सहयोग तक विस्तृत हुए हैं। दक्षिण कोरिया जहाज निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक विनिर्माण में वैश्विक अग्रणी देशों में शामिल है, जबकि भारत दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और बुनियादी ढांचा क्षेत्र का एक बड़ा बाजार है। दोनों देश जी-20 के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी मिलकर कार्य कर रहे हैं।

सियोल वार्ता में सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

सियोल में हुई बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने राजनीतिक संबंधों, जहाज निर्माण, व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा की। इसके अलावा स्टार्टअप और फिनटेक जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सहयोग को “शिप्स टू चिप्स” की संकल्पना से जोड़ा। उनका आशय था कि दोनों देश जहाज निर्माण से लेकर सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अपनी पूरक क्षमताओं का लाभ उठाकर व्यापक औद्योगिक साझेदारी विकसित कर सकते हैं।

जेजू फोरम में वैश्विक सहयोग पर जोर

जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी दक्षिण कोरिया का एक प्रतिष्ठित वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसमें राजनीतिक नेता, राजनयिक, शिक्षाविद और नीति विशेषज्ञ वैश्विक शांति, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श करते हैं। अपने संबोधन में एस. जयशंकर ने बदलते वैश्विक परिदृश्य में सहयोग की पांच प्रमुख प्राथमिकताएं प्रस्तुत कीं। इनमें मजबूत और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं, विश्वसनीय साझेदारियां, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार तथा ग्लोबल साउथ के देशों को अधिक समर्थन देने पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रभावी बहुपक्षीय व्यवस्था से ही संभव है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत और दक्षिण कोरिया के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1973 में स्थापित हुए थे।
  • जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप पर आयोजित होने वाला वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है।
  • दक्षिण कोरिया विश्व के प्रमुख जहाज निर्माण देशों में शामिल है।
  • फिनटेक (FinTech) का अर्थ वित्तीय प्रौद्योगिकी है, जिसमें डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और अन्य डिजिटल वित्तीय सेवाएं शामिल हैं।
  • भारत और दक्षिण कोरिया दोनों जी-20 के सदस्य हैं तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विभिन्न रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग करते हैं।

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती और नई प्रौद्योगिकियों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जेजू फोरम में भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक मंचों पर उसकी बढ़ती कूटनीतिक भूमिका और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

Originally written on June 25, 2026 and last modified on June 25, 2026.

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