नासा के पर्सिवियरेंस रोवर को मंगल पर मिला जटिल कार्बन, जीवन की खोज को मिली नई दिशा
मंगल ग्रह पर प्राचीन जीवन की संभावनाओं की खोज में वैज्ञानिकों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। 24 जून 2026 को नासा ने बताया कि उसके पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल के जेज़ेरो क्रेटर स्थित नेरेटवा वैलिस के ब्राइट एंजेल आउटक्रॉप क्षेत्र की दो मडस्टोन चट्टानों में जटिल मैक्रोमॉलिक्यूलर कार्बन का पता लगाया है। यह अब तक जेज़ेरो क्रेटर में कार्बनिक पदार्थों की सबसे मजबूत पहचान मानी जा रही है। हालांकि यह खोज मंगल पर जीवन का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, लेकिन यह इस संभावना को और मजबूत करती है कि अरबों वर्ष पहले यह ग्रह जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ रखता था।
पर्सिवियरेंस मिशन और जेज़ेरो क्रेटर का महत्व
नासा का पर्सिवियरेंस रोवर फरवरी 2021 में जेज़ेरो क्रेटर पर उतरा था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह क्षेत्र कभी एक विशाल झील और नदी डेल्टा का हिस्सा था। इसी कारण यह मंगल पर प्राचीन जल गतिविधियों और संभावित सूक्ष्मजीवी जीवन के संकेतों की खोज के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। जेज़ेरो क्रेटर की तलछटी चट्टानें अरबों वर्ष पुराने पर्यावरणीय इतिहास को सुरक्षित रखने की क्षमता रखती हैं।
मैक्रोमॉलिक्यूलर कार्बन की खोज क्यों महत्वपूर्ण है?
मैक्रोमॉलिक्यूलर कार्बन बड़े और जटिल कार्बन-समृद्ध संरचनाओं का समूह होता है। ब्राइट एंजेल क्षेत्र की एक मडस्टोन में यह सिलिकेट खनिजों के साथ मिला, जबकि दूसरी मडस्टोन में यह कार्बोनेट और सल्फेट खनिजों के साथ पाया गया। अलग-अलग खनिजों के साथ इसकी उपस्थिति से संकेत मिलता है कि कार्बन युक्त पदार्थ चट्टानों के इतिहास में अलग-अलग समय पर जमा हुए होंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मंगल पर प्राकृतिक चट्टान की सतह पर मैक्रोमॉलिक्यूलर कार्बन का पहला पुष्ट पता है। हालांकि ऐसे कार्बन का निर्माण जैविक और अजैविक दोनों प्रक्रियाओं से हो सकता है, इसलिए इसे जीवन का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
शेरलॉक उपकरण और आगे की वैज्ञानिक चुनौती
इस अध्ययन के लिए पर्सिवियरेंस ने अपने रोबोटिक आर्म पर लगे शेरलॉक (SHERLOC) उपकरण का उपयोग किया। यह पराबैंगनी रमन तथा फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी की सहायता से कार्बनिक यौगिकों और खनिजों की पहचान करता है। इसी क्षेत्र की चट्टानों पर वर्ष 2024 में दिखाई देने वाले प्रसिद्ध “लेपर्ड स्पॉट्स” ने भी वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया था, जिन्हें संभावित बायोसिग्नेचर के रूप में जांचा गया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन नमूनों की वास्तविक उत्पत्ति का पता केवल पृथ्वी की उन्नत प्रयोगशालाओं में विस्तृत विश्लेषण से ही लगाया जा सकेगा। हालांकि मंगल सैंपल रिटर्न कार्यक्रम को जनवरी 2026 में प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया गया, फिर भी भविष्य में संशोधित योजना के तहत नमूनों को पृथ्वी लाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जेज़ेरो क्रेटर एक प्राचीन प्रभाव बेसिन है, जहाँ कभी झील और नदी डेल्टा मौजूद थे।
- पर्सिवियरेंस रोवर फरवरी 2021 से मंगल पर वैज्ञानिक अध्ययन और चट्टानों के नमूने एकत्र करने का कार्य कर रहा है।
- क्यूरियोसिटी और पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल पर 3,500 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित क्षेत्रों में कार्बनिक पदार्थों वाले मडस्टोन की पहचान की है।
- शेरलॉक उपकरण पराबैंगनी रमन और फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग करके कार्बनिक यौगिकों तथा खनिजों का विश्लेषण करता है।
मंगल पर जटिल कार्बन की यह नई खोज वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यद्यपि इससे यह सिद्ध नहीं होता कि कभी मंगल पर जीवन था, लेकिन यह संकेत अवश्य मिलता है कि लाल ग्रह पर जीवन के लिए आवश्यक रासायनिक तत्व व्यापक रूप से मौजूद रहे होंगे। भविष्य में यदि इन नमूनों का पृथ्वी पर विस्तृत परीक्षण संभव हो सका, तो यह खोज मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास और संभावित प्राचीन जीवन के रहस्य से पर्दा उठा सकती है।