ग्रामीण रोजगार के नए ढांचे में 318 कार्यों की अंतरिम सूची जारी
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की दिशा में केंद्र सरकार ने 24 जून 2026 को नए ग्रामीण रोजगार ढांचे के तहत 318 अनुमेय कार्यों (Permissible Works) की अंतरिम सूची अधिसूचित की है। यह नया ढांचा 1 जुलाई 2026 से लागू होगा और विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही लगभग दो दशकों से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह नई व्यवस्था लागू होगी।
नए कानून की प्रमुख विशेषताएं
विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 नए ग्रामीण रोजगार तंत्र का कानूनी आधार है। इस अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। पहले मनरेगा के तहत यह सीमा 100 दिनों की थी। सरकार का उद्देश्य रोजगार सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण और आजीविका के अवसरों का विस्तार करना है।
318 कार्य चार प्रमुख विषयों में विभाजित
सरकार द्वारा जारी अंतरिम सूची में शामिल 318 कार्यों को चार प्रमुख विषयगत श्रेणियों में रखा गया है—
- जल सुरक्षा
- ग्रामीण आधारभूत संरचना
- ग्रामीण आजीविका
- अत्यधिक मौसमीय घटनाओं के प्रभावों को कम करने वाले विशेष कार्य
नई व्यवस्था में “एक योजना–अनेक वित्तपोषण” (Single Plan–Multi Funding) की अवधारणा अपनाई गई है। इसके अंतर्गत विकसित ग्राम पंचायत योजना ग्राम पंचायत स्तर पर सभी विकास कार्यों की मुख्य योजना होगी, जिससे विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की योजनाओं का बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सकेगा।
राज्यों और मंत्रालयों से सुझाव आमंत्रित
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 24 जून 2026 को अंतरिम सूची राज्यों और विभिन्न मंत्रालयों के साथ साझा करते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अतिरिक्त कार्यों के सुझाव मांगे हैं। 24 और 25 जून को आयोजित उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसाल ने की, जिसमें 18 मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य राज्यों की जरूरतों के अनुरूप अंतिम सूची तैयार करना है।
राज्यों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
कर्नाटक सरकार ने नए वित्तीय साझेदारी मॉडल पर आपत्ति जताई है। नए ढांचे में अधिकांश राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच व्यय साझेदारी का अनुपात 90:10 से बदलकर 60:40 किया गया है। वहीं जम्मू-कश्मीर ने 24 जून 2026 को अपने क्षेत्र के लिए विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) योजना, 2026 अधिसूचित कर दी है, जो 1 जुलाई 2026 से मनरेगा का स्थान लेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मनरेगा अधिनियम वर्ष 2005 में लागू किया गया था और इसके तहत ग्रामीण परिवारों को प्रतिवर्ष 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती थी।
- नए ग्रामीण रोजगार ढांचे में रोजगार की गारंटी बढ़ाकर 125 दिन प्रति ग्रामीण परिवार कर दी गई है।
- विकसित ग्राम पंचायत योजना नई व्यवस्था में ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की मुख्य योजना होगी।
- 19 जून 2026 को केंद्र सरकार ने संक्रमण प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती की घोषणा की थी।
- अंतरिम सूची में कुल 318 कार्य शामिल हैं, जिन्हें चार प्रमुख विषयगत श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
ग्रामीण रोजगार प्रणाली में यह बदलाव केवल रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य विभिन्न सरकारी योजनाओं के बेहतर समन्वय, जल संरक्षण, आधारभूत ढांचे के विकास, जलवायु अनुकूल परिसंपत्तियों के निर्माण तथा ग्रामीण आजीविका को अधिक मजबूत बनाना भी है। यदि राज्यों के सुझावों को शामिल करते हुए अंतिम सूची तैयार होती है, तो यह नया ढांचा ग्रामीण विकास की दिशा में एक व्यापक और समन्वित मॉडल के रूप में सामने आ सकता है।