भारत-दक्षिण कोरिया के बीच 16 समझौते, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
भारत और दक्षिण कोरिया ने सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, ई-मोबिलिटी और उन्नत विनिर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में 16 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 27 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 54 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। ये समझौते दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी वार्ता के दौरान हुए।
यह साझेदारी ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर महंगाई, ऊर्जा असुरक्षा और भू-राजनीतिक तनावों के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है। ऐसे में भारत और दक्षिण कोरिया दोनों भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं।
व्यापार लक्ष्य और CEPA का उन्नयन
वर्तमान में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27 अरब अमेरिकी डॉलर का है। दोनों देशों ने इसे 2030 तक दोगुना कर 54 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि आवश्यक होगी।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दोनों देश 2009 में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को अपग्रेड करने पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य गैर-शुल्क बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को कम करना, नियमों को सरल बनाना, बाजार पहुंच को बेहतर करना और दोनों देशों की कंपनियों के लिए व्यापार संचालन को आसान बनाना है।
भविष्य के उद्योगों पर विशेष फोकस
नए समझौते उन क्षेत्रों पर केंद्रित हैं, जो आने वाले दो दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देंगे। इनमें सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरियां, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, शिपबिल्डिंग, डिजिटल व्यापार और स्वच्छ ऊर्जा प्रमुख हैं।
दोनों देशों ने सह-उत्पादन (Co-production), सह-डिजाइन (Co-design) और सह-नवाचार (Co-innovation) पर भी चर्चा की, ताकि वैश्विक बाजारों के लिए संयुक्त रूप से प्रतिस्पर्धी उत्पाद तैयार किए जा सकें। भारत में दक्षिण कोरियाई निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष “कोरिया-विशिष्ट औद्योगिक टाउनशिप” विकसित करने की भी योजना है, जहां प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु सहयोग
इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हरित ऊर्जा और जलवायु सहयोग है। भारत और दक्षिण कोरिया ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत सहयोग पर सहमति जताई है, जो देशों के बीच कार्बन उत्सर्जन में कमी के व्यापार की अनुमति देता है।
भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य दोहराया, जबकि दक्षिण कोरिया ने 2050 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य बनाए रखा है। नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और बैटरी तकनीक में सहयोग से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CEPA का पूरा नाम Comprehensive Economic Partnership Agreement है, जो भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 2009 में हस्ताक्षरित हुआ था।
- पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6.2 देशों को कार्बन ट्रेडिंग सहयोग की अनुमति देता है।
- भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, जबकि दक्षिण कोरिया का लक्ष्य 2050 है।
- सेमीकंडक्टर, बैटरी और ई-मोबिलिटी भविष्य की वैश्विक औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के प्रमुख क्षेत्र माने जाते हैं।
इसी दौरान भारत अमेरिका के साथ भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के करीब है। इससे स्पष्ट है कि भारत अपनी आर्थिक साझेदारियों को विविध बनाकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। दक्षिण कोरिया और अमेरिका दोनों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध भारत को किसी एक बाजार पर निर्भरता कम करने, निवेश आकर्षित करने और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने में मदद करेंगे।