भारत के एलपीजी आयात में बड़ा बदलाव, अमेरिका बना सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

भारत के एलपीजी आयात में बड़ा बदलाव, अमेरिका बना सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

वर्ष 2026 में भारत के तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आयात पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक भारत के एलपीजी आयात में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मध्य-पूर्वी देशों की हिस्सेदारी कम हुई है, जबकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। यह बदलाव वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े रणनीतिक निर्णयों का परिणाम माना जा रहा है।

भारत में एलपीजी का महत्व

एलपीजी अर्थात तरलीकृत पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है, जिसे दबाव में तरल रूप में संग्रहित किया जाता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ताओं में शामिल है। इसका उपयोग घरेलू रसोई गैस, औद्योगिक ईंधन तथा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। अब तक भारत की एलपीजी आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा होता रहा है। इसके पीछे कम दूरी, कम परिवहन लागत और पुराने व्यापारिक संबंध प्रमुख कारण रहे हैं।

अमेरिका की बढ़ती हिस्सेदारी

मई 2026 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक रही। इसी अवधि में अमेरिका से भारत को लगभग 6.66 लाख टन एलपीजी की आपूर्ति हुई, जो फरवरी 2026 की तुलना में काफी अधिक थी। इस वृद्धि के पीछे नवंबर 2025 में भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के बीच हुआ दीर्घकालिक समझौता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे भारत को एलपीजी आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने में सहायता मिली है।

पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति बाधाएं

फरवरी 2026 के अंत में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के कारण खाड़ी क्षेत्र से एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधानों ने संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे प्रमुख निर्यातकों से होने वाली आपूर्ति पर असर डाला। होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

भारत-अमेरिका एलपीजी समझौता

नवंबर 2025 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अमेरिका के गल्फ कोस्ट क्षेत्र से प्रतिवर्ष लगभग 22 लाख टन एलपीजी आयात करने के लिए एक वर्ष का समझौता किया था। इस समझौते का उद्देश्य वर्ष 2026 में भारत की कुल एलपीजी आयात आवश्यकता का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा पूरा करना था। वर्तमान परिस्थितियों में यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

अन्य आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका

भारत ने मार्च 2026 में सात वर्षों के अंतराल के बाद ईरान से एलपीजी आयात फिर से शुरू किया। मई 2026 में ईरान ने 1.45 लाख टन एलपीजी की आपूर्ति की, जिससे वह उस महीने भारत का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया। इसके अलावा भारत ने ऑस्ट्रेलिया, रूस, अर्जेंटीना, कांगो, अंगोला, नाइजीरिया और कैमरून जैसे देशों से भी सीमित मात्रा में एलपीजी आयात किया। यह रणनीति भारत की ऊर्जा आपूर्ति को अधिक विविध और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एलपीजी का पूर्ण रूप लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस है, जिसमें मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन शामिल होते हैं।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
  • इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल भारत की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां हैं।
  • अमेरिका का गल्फ कोस्ट क्षेत्र एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख निर्यात केंद्रों में से एक है।

भारत के एलपीजी आयात स्रोतों में आया यह बदलाव देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है। विविध आपूर्ति स्रोतों पर बढ़ता ध्यान भविष्य में संभावित भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने और ऊर्जा आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने में सहायक हो सकता है।

Originally written on June 5, 2026 and last modified on June 5, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *