आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने गठित किए छह कार्य समूह
भारत सरकार ने 4 जून 2026 को घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से छह क्षेत्र-विशिष्ट कार्य समूहों का गठन किया है। इन समूहों को ऐसे 100 तक उत्पादों की पहचान करने का कार्य सौंपा गया है, जिनका उत्पादन भारत में या तो नहीं हो रहा है या पर्याप्त मात्रा में नहीं हो रहा है। सरकार का उद्देश्य इन उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आत्मनिर्भरता को मजबूत करना और वैश्विक बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाना है।
कार्य समूहों की संरचना
प्रत्येक कार्य समूह की अध्यक्षता उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव करेंगे। इन समूहों में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इनमें वाणिज्य मंत्रालय, नीति आयोग, आर्थिक मामलों का विभाग, औषधि विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, बंदरगाह एवं नौवहन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़े विभाग शामिल हैं।
किन क्षेत्रों को किया गया शामिल
सरकार द्वारा गठित छह कार्य समूह विभिन्न रणनीतिक और औद्योगिक क्षेत्रों को कवर करते हैं। इनमें शामिल हैं:
- औषधि, जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा उपकरण
- रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र और फुटवियर
- पूंजीगत वस्तुएं, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन और उन्नत पूंजीगत उपकरण
- ऊर्जा क्षेत्र
- निर्माण उपकरण एवं अवसंरचना
- रक्षा एवं एयरोस्पेस (नागरिक उपयोग के लिए) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स
इन क्षेत्रों का चयन भारत की आयात निर्भरता, औद्योगिक क्षमता और भविष्य की आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
आयात प्रतिस्थापन का उद्देश्य
कार्य समूहों का मुख्य उद्देश्य ऐसे उत्पादों की पहचान करना है, जिनका घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यह पहल केवल घरेलू मांग को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे उत्पादों को वैश्विक निर्यात बाजारों के लिए भी विकसित करने पर केंद्रित है। इन समूहों को 4 जून 2026 से तीन सप्ताह के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट और उत्पादों की सूची कैबिनेट सचिवालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
बढ़ते आयात और आर्थिक संदर्भ
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल आयात 7.5 प्रतिशत बढ़कर 775 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में कच्चा तेल 174 अरब डॉलर के साथ सबसे बड़ा आयातित उत्पाद रहा। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का आयात 116.2 अरब डॉलर, मशीनरी का 61.73 अरब डॉलर, परिवहन उपकरणों का 34.75 अरब डॉलर, कोयला, कोक एवं ब्रिकेट्स का 27.9 अरब डॉलर तथा रसायनों का लगभग 28 अरब डॉलर रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत अभी भी आयात पर काफी निर्भर है, जिसे कम करने के लिए यह पहल शुरू की गई है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बल
यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली औद्योगिक नीतियों के अनुरूप माना जा रहा है। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरण, ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादन बढ़ाने से रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और विदेशी मुद्रा की बचत में मदद मिल सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डीपीआईआईटी का पूर्ण रूप उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल आयात 775 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
- इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं भारत के सबसे बड़े आयातित उत्पादों में शामिल हैं।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को इस पहल में ऑटोमोबाइल और उन्नत पूंजीगत वस्तुओं के साथ शामिल किया गया है।
सरकार द्वारा गठित ये छह कार्य समूह भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि इनकी सिफारिशों के आधार पर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, तो भारत न केवल आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा, बल्कि वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में भी अपनी स्थिति को मजबूत कर पाएगा।