भारत में एथेनॉल ईंधन अवसंरचना के विस्तार की तैयारी
भारत सरकार ने एथेनॉल आधारित ईंधन प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल वितरण अवसंरचना के विस्तार की घोषणा की है। योजना के तहत वर्ष 2026 के अंत तक 500 फ्लेक्स-फ्यूल रिटेल पंप स्थापित करने और वर्ष 2027 के अंत तक लगभग 5,000 आउटलेट शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल देश की जैव ईंधन नीति, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की उपलब्धि
एथेनॉल मिश्रण का अर्थ पेट्रोल में निश्चित अनुपात में एथेनॉल मिलाना है। भारत ने वर्ष 2025 में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई20) का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि इसका मूल लक्ष्य वर्ष 2030 तक निर्धारित था। यह उपलब्धि ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ई20 का अर्थ है पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण, जबकि ई85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। भविष्य में उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों के उपयोग को बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की बढ़ती भूमिका
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं जो विभिन्न अनुपातों वाले पेट्रोल-एथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं। पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की तुलना में ये वाहन अधिक लचीले होते हैं और उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग कर सकते हैं। भारत में हाल के वर्षों में कई फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किए गए हैं। इनमें मारुति सुजुकी की वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल तथा हीरो मोटोकॉर्प की स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स मोटरसाइकिलें शामिल हैं, जो ई20 से लेकर ई85 तक के मिश्रण पर चलने में सक्षम हैं।
नई नियमावली और ईंधन मानक
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 27 अप्रैल 2026 को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव रखा। इसके अंतर्गत ई85 और ई100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को मान्यता देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही बी100, अर्थात 100 प्रतिशत बायोडीजल मिश्रण वाले ईंधन के उपयोग को भी प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव शामिल है। इन परिवर्तनों का उद्देश्य वैकल्पिक और पर्यावरण-अनुकूल ईंधनों के उपयोग को बढ़ाना है।
चरणबद्ध विस्तार योजना
एथेनॉल वितरण नेटवर्क का पहला चरण दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे प्रमुख शहरों में शुरू किया जाएगा। इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में भी फ्लेक्स-फ्यूल पंपों का विस्तार किया जाएगा। यह अवसंरचना फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बढ़ते उपयोग को समर्थन प्रदान करेगी और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध कराएगी।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
सरकारी अनुमानों के अनुसार यदि नए दोपहिया और यात्री वाहन बिक्री का लगभग आधा हिस्सा फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अपनाता है, तो अतिरिक्त एथेनॉल की मांग 300 करोड़ लीटर से अधिक हो सकती है। इससे किसानों की आय में लगभग 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि होने की संभावना है। इसके अलावा कार्बन उत्सर्जन में लगभग 66.4 लाख मीट्रिक टन तक की कमी आ सकती है, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ई20 का अर्थ है पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण।
- ई85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है।
- बी100 का अर्थ है 100 प्रतिशत बायोडीजल युक्त ईंधन।
- फ्लेक्स-फ्यूल वाहन विभिन्न एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण अनुपातों पर चल सकते हैं।
भारत में एथेनॉल अवसंरचना और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का विस्तार ऊर्जा आत्मनिर्भरता, किसानों की आय वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह कार्यक्रम देश को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।