भारत की समुद्री निर्भरता घटाने की तैयारी, 100 नए जहाजों से बदलेगा माल ढुलाई ढांचा

भारत की समुद्री निर्भरता घटाने की तैयारी, 100 नए जहाजों से बदलेगा माल ढुलाई ढांचा

भारत अगले पाँच वर्षों में अपने मर्चेंट फ्लीट में 100 नए जहाज जोड़ने की योजना बना रहा है, ताकि कच्चे तेल, गैस, कोयला और यूरिया जैसे अहम आयातित माल के लिए विदेशी शिपिंग लाइनों पर निर्भरता कम की जा सके। यह कदम देश के भारी विदेशी फ्रेट बिल को घटाने और समुद्री परिवहन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समुद्री ढांचे को मजबूत करने की रणनीति

यह घोषणा 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित पहले सागर संवाद सम्मेलन में की गई। इस सम्मेलन का आयोजन नेशनल शिपिंग बोर्ड ने किया था, जिसमें Maritime India Vision 2030 और Maritime Amrit Kaal Vision 2047 के लिए नीतिगत दिशा पर चर्चा हुई। भारत का मौजूदा घरेलू मर्चेंट फ्लीट लगभग 1,600 फ्लैग्ड जहाजों का है। फ्लैग्ड जहाज वह होता है जो किसी देश के झंडे के तहत पंजीकृत होता है और उसी देश के समुद्री कानून, कर व्यवस्था और सुरक्षा नियमों के अधीन चलता है।

विदेशी फ्रेट बिल और लागत की चुनौती

भारत हर साल विदेशी शिपिंग लाइनों को लगभग 75 अरब डॉलर माल ढुलाई के रूप में देता है। यह राशि मुख्य रूप से कच्चे तेल, तरलीकृत गैस, कोयला और उर्वरक इनपुट जैसे माल के परिवहन पर खर्च होती है। उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, भारतीय झंडे वाले जहाज को चलाने की लागत विदेशी झंडे वाले जहाज की तुलना में 16% से 20% अधिक बैठती है। इस अंतर के पीछे जहाज आयात पर कर, रखरखाव खर्च, नाविकों के वेतन और देश में पूंजी की ऊँची लागत जैसे कारण बताए गए हैं।

नीति सुधार और घरेलू क्षमता पर जोर

नेशनल शिपिंग बोर्ड ने इस चुनौती से निपटने के लिए पाँच स्तंभों वाला रोडमैप सुझाया है। इसमें कर और वित्तीय सुधार, सुनिश्चित कार्गो समर्थन, प्रतिस्पर्धी वित्तपोषण, नियामकीय सरलीकरण और कारोबार करने में आसानी बढ़ाने जैसे उपाय शामिल हैं। बोर्ड ने अपना 2025-26 वार्षिक प्रतिवेदन और नीति उपसमिति की सिफारिशें भी केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय को सौंपी हैं।

इसी बीच, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ की Container Manufacturing Assistance Scheme के तहत भारत में बने कंटेनरों की मांग भी बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, Maersk ने भारत में निर्मित कंटेनरों के ऑर्डर देना शुरू कर दिया है, जबकि Hapag-Lloyd और NYK जैसी वैश्विक शिपिंग कंपनियाँ भारतीय ध्वज के तहत जहाजों को रीफ्लैग करने की प्रक्रिया में हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नेशनल शिपिंग बोर्ड भारत में समुद्री नीति और शिपिंग सेक्टर की योजना से जुड़ा एक वैधानिक निकाय है।
  • Maritime India Vision 2030 बंदरगाह-आधारित और शिपिंग क्षेत्र के विकास के लिए राष्ट्रीय रूपरेखा है।
  • Maritime Amrit Kaal Vision 2047 भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक के लिए दीर्घकालिक समुद्री रोडमैप है।
  • फ्लैग्ड जहाज वह जहाज होता है जो किसी देश में पंजीकृत होकर उसी देश के नियमों के तहत संचालित होता है।

100 नए जहाज जोड़ने की यह योजना भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता, लॉजिस्टिक्स सुरक्षा और विदेशी मुद्रा बचत की दिशा में एक अहम कदम है। यदि नीति और लागत संबंधी बाधाएँ कम होती हैं, तो आने वाले वर्षों में देश का शिपिंग ढांचा अधिक प्रतिस्पर्धी और सक्षम बन सकता है।

Originally written on August 26, 2026 and last modified on August 26, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *