फार्मा निर्यात में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए CBN-फार्मेक्सिल समझौता

फार्मा निर्यात में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए CBN-फार्मेक्सिल समझौता

भारत से दवाओं के निर्यात को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और नियमसम्मत बनाने के लिए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) और फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (PHARMEXCIL) ने 24 अगस्त 2026 को ग्वालियर स्थित CBN मुख्यालय में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह पहल वैध फार्मा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ उत्पादों के दुरुपयोग और अवैध diversion को रोकने पर केंद्रित है।

समझौते का उद्देश्य क्या है

इस MoU के तहत एक गैर-बाध्यकारी स्वैच्छिक आचार संहिता (Voluntary Code of Conduct – VCC) लागू करने की रूपरेखा बनाई गई है। इसका मकसद निर्यात प्रक्रिया में अनुपालन को मजबूत करना, संदिग्ध ऑर्डरों की पहचान करना और उद्योग तथा नियामक तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

इस व्यवस्था में सदस्य कंपनियों के लिए Know Your Customer (KYC) जांच, संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग और नामित संपर्क अधिकारियों के माध्यम से सीधी सूचना-व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल हैं। इससे निर्यात श्रृंखला में जोखिम कम करने और वैध व्यापार को सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

CBN और PHARMEXCIL की भूमिका

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है। यह भारत में अफीम पोस्ता की खेती की निगरानी करने वाली नोडल संस्था है और नारकोटिक पदार्थों तथा नियंत्रित रासायनिक इनपुट्स के आयात-निर्यात प्राधिकरण जारी करने का काम भी करता है। ब्यूरो का कार्य नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट, 1985 के कानूनी ढांचे के अंतर्गत आता है।

वहीं PHARMEXCIL की स्थापना वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने फार्मा निर्यात संवर्धन परिषद के रूप में की है। यह दवा क्षेत्र के निर्यातकों और सदस्य कंपनियों के साथ मिलकर काम करती है। इस समझौते के जरिए परिषद से उद्योग-आधारित सुझाव लेकर बेहतर प्रथाओं का मसौदा तैयार करने की भी बात है।

नियामकीय सहयोग और व्यापार सुगमता

यह MoU भारत की National Roadmap for Ease of Doing Business से भी जुड़ा है, जिसका उद्देश्य व्यापार और नियामकीय प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाओं को कम करना है। खास बात यह है कि इस समझौते से निर्यातकों पर कोई अतिरिक्त वैधानिक या वित्तीय बोझ नहीं डाला गया है।

सरकारी संस्थानों और निर्यात संवर्धन निकायों के बीच इस तरह की साझेदारी पहले भी देखी गई है। CBN ने इससे पहले CHEMEXCIL जैसे निकायों के साथ भी इसी तरह के नियामकीय-उद्योग सहयोग मॉडल अपनाए हैं। हालिया बैठक में छह महीने की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई, जिसमें देशभर में जागरूकता, हितधारकों को संवेदनशील बनाने और संस्थागत सहयोग के बिंदु शामिल थे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CBN वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और नारकोटिक नियंत्रण से जुड़ी प्रमुख संस्था है।
  • PHARMEXCIL वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत फार्मा निर्यात संवर्धन परिषद है।
  • NDPS Act, 1985 भारत में नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों को नियंत्रित करने वाला मुख्य कानून है।
  • KYC का उपयोग व्यापारिक साझेदारों और ग्राहकों की पहचान सत्यापित करने के लिए किया जाता है।

यह समझौता भारत के फार्मा निर्यात ढांचे में अनुपालन, निगरानी और उद्योग-सरकार समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Originally written on August 25, 2026 and last modified on August 25, 2026.

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