भारतीय चावल निर्यात ने नए बाजारों में पकड़ी रफ्तार
भारत के चावल निर्यात ने 26 प्राथमिक बाजारों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच इन बाजारों में चावल निर्यात का मूल्य ₹23,476 करोड़ और मात्रा 4.79 मिलियन टन रही। भारतीय राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने 26 अगस्त 2026 को जारी विश्लेषण में इसे पिछले तीन वर्षों के इसी अवधि के औसत से बेहतर बताया।
निर्यात में बढ़त के पीछे क्या है
चावल भारत के प्रमुख कृषि निर्यातों में शामिल है और इसमें बासमती तथा गैर-बासमती, दोनों तरह की किस्में आती हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है, इसलिए इसकी विदेशी मांग का असर कृषि मूल्य, लॉजिस्टिक्स और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े क्षेत्रों पर भी पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 26 प्राथमिक बाजारों में निर्यात मूल्य में 1.1% और निर्यात मात्रा में 5.6% की वृद्धि दर्ज हुई। यह संकेत देता है कि भारतीय चावल की मांग केवल पारंपरिक खरीदार देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि नए और विविध बाजारों में भी इसकी पकड़ मजबूत हो रही है।
यूएई और यूरोप में सबसे तेज़ वृद्धि
संयुक्त अरब अमीरात ने साल-दर-साल निर्यात मूल्य वृद्धि में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। वहां चावल निर्यात का मूल्य 65% बढ़कर ₹3,859.04 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि मात्रा में 64% की वृद्धि दर्ज हुई। यूरोपीय बाजारों में भी इस अवधि के दौरान शिपमेंट बढ़े। बेल्जियम में निर्यात मूल्य 53.8% बढ़ा, जर्मनी में 33.5%, फ्रांस में 31.3% और यूनाइटेड किंगडम में 26.9% की वृद्धि हुई।
दक्षिण अफ्रीका में निर्यात मात्रा 42.9% बढ़ी। मेक्सिको में शिपमेंट 50.9% बढ़े और निर्यात मूल्य में 22.1% की वृद्धि हुई। सेनेगल में भी निर्यात मात्रा 29.9% बढ़ी। ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय चावल अब अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के कई हिस्सों में अपनी जगह बना रहा है।
व्यापार मार्ग और रणनीति में बदलाव
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, ईरान को होने वाले निर्यात, जो भारत के वैश्विक चावल शिपमेंट का लगभग 7% है, वैकल्पिक भुगतान मार्गों के जरिए जारी रहने की उम्मीद है। इनमें संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, चीन और तुर्की के रास्ते शामिल बताए गए हैं।
निर्यात बढ़ाने के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण तथा भारतीय राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ‘क्यूज़ीन-लिंक्ड’ रणनीति अपना रहे हैं। इसका अर्थ है कि भारतीय चावल की किस्मों को विदेशी बाजारों की स्थानीय खानपान पसंद के अनुरूप पेश किया जाए, ताकि मांग को और बेहतर तरीके से बढ़ाया जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एपीडा यानी Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निर्यात संवर्धन निकाय है।
- चावल एक अनाज है और यह Poaceae परिवार से संबंधित है।
- भारत बासमती और गैर-बासमती, दोनों प्रकार के चावल का निर्यात करता है।
- भारत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चावल के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है।
चावल निर्यात में यह बढ़त भारत की कृषि-व्यापार क्षमता और बाजार विविधीकरण की दिशा में एक अहम संकेत है। आने वाले महीनों में नई मांग, भुगतान मार्गों और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर इसका असर और स्पष्ट हो सकता है।