ग्रामीण ढांचे को मजबूती देने के लिए NABARD-NaBFID की साझेदारी

ग्रामीण ढांचे को मजबूती देने के लिए NABARD-NaBFID की साझेदारी

ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे और कृषि-आधारित परियोजनाओं को नई वित्तीय ताकत देने के लिए NABARD और NaBFID के बीच समझौता हुआ है। मुंबई में 26 अगस्त 2026 को हुए इस MoU के तहत दोनों संस्थान ग्रामीण संपर्क, कृषि मूल्य शृंखला और सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं पर मिलकर काम करेंगे।

समझौते का दायरा क्या है

इस साझेदारी का फोकस उन परियोजनाओं पर रहेगा जिनका सीधा संबंध गांवों, खेती और कृषि-लॉजिस्टिक्स से है। इसमें सिंचाई, जल एवं स्वच्छता, कटाई के बाद भंडारण, कोल्ड-चेन, टर्मिनल मार्केट, ग्रामीण सड़कें, पुल, वेयरहाउसिंग और कंप्रेस्ड बायोगैस जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में निवेश से न केवल कृषि उत्पादों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य भी मिल सकेगा। खासकर कोल्ड-चेन और भंडारण सुविधाएं खराब होने वाली उपज के नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

दोनों संस्थानों की भूमिका

NABARD देश में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए शीर्ष विकास वित्तीय संस्थान है। इसकी स्थापना 1982 में NABARD अधिनियम, 1981 के तहत हुई थी। दूसरी ओर NaBFID की स्थापना 2021 में NaBFID अधिनियम, 2021 के तहत एक विशेष विकास वित्तीय संस्थान के रूप में की गई, जिसका उद्देश्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराना है।

इस MoU के जरिए दोनों संस्थान परियोजना पहचान, मूल्यांकन, ऋण संरचना, ऋण सिंडिकेशन, संयुक्त निगरानी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। यानी केवल फंडिंग ही नहीं, बल्कि परियोजनाओं की तैयारी और क्रियान्वयन की प्रक्रिया में भी साझा काम होगा।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

यह समझौता उन परियोजनाओं के लिए खास है जो व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य हैं और बैंक योग्य मानी जा सकती हैं। खाद्य प्रसंस्करण और भंडारण से जुड़ी परियोजनाएं भी इसके दायरे में आएंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश का दायरा बढ़ सकता है और कृषि मूल्य शृंखला अधिक मजबूत हो सकती है।

ग्रामीण अवसंरचना केवल सड़क या पुल तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें सिंचाई व्यवस्था, भंडारण, स्वच्छता नेटवर्क और परिवहन तंत्र भी शामिल हैं। ऐसे ढांचे के बिना कृषि उत्पादन का पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाता।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • NABARD की स्थापना 1982 में हुई थी और यह कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए शीर्ष विकास वित्तीय संस्थान है।
  • NaBFID की स्थापना 2021 में हुई और यह भारत में अवसंरचना वित्तपोषण के लिए विशेष संस्थान है।
  • PPP का अर्थ Public Private Partnership है, जो सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर आधारित मॉडल है।
  • कोल्ड-चेन सुविधाएं तापमान नियंत्रित भंडारण और परिवहन के लिए उपयोग होती हैं, खासकर खराब होने वाली वस्तुओं के लिए।

यह साझेदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि परियोजनाएं समय पर आगे बढ़ती हैं, तो इसका सीधा लाभ किसानों, ग्रामीण बाजारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है।

Originally written on August 27, 2026 and last modified on August 27, 2026.

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