देश के 45 ताप बिजलीघरों में कोयले का संकट गहराया

देश के 45 ताप बिजलीघरों में कोयले का संकट गहराया

भारत के बिजली क्षेत्र में कोयले की उपलब्धता एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। 27 अगस्त 2026 के सरकारी और उद्योग आंकड़ों के अनुसार देश के 45 कोयला-आधारित बिजलीघरों में कोयले का भंडार बेहद कम स्तर पर पहुंच गया था। इनमें से 40 संयंत्र घरेलू कोयले पर आधारित थे। कई इकाइयों के पास इतना ईंधन नहीं था कि वे तीन दिन से अधिक सामान्य उत्पादन जारी रख सकें।

कम भंडार का मतलब क्या होता है

ताप बिजलीघरों में कोयले का आकलन आमतौर पर इस आधार पर किया जाता है कि उपलब्ध ईंधन कितने दिनों तक संयंत्र को चलाया जा सकता है। जब भंडार तीन दिन से कम रह जाए या जरूरत के मुकाबले 25 प्रतिशत से नीचे आ जाए, तो उसे गंभीर स्थिति माना जाता है। यही वजह है कि इस तरह की कमी सीधे बिजली उत्पादन और ग्रिड स्थिरता पर असर डाल सकती है।

आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव क्यों बढ़ा

भारत की कोयला-आधारित बिजली व्यवस्था खदानों से संयंत्रों तक नियमित रेल आपूर्ति पर बहुत निर्भर है। कोयला उत्पादन वाले राज्यों से थर्मल प्लांटों तक रेक के जरिए ईंधन पहुंचाया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ संयंत्रों को रोजाना जरूरत के पांच से छह रेकों में से केवल आधी आपूर्ति मिल रही थी। इससे स्टॉक भरने की रफ्तार धीमी पड़ गई।

इस दौरान भारी मानसूनी बारिश ने ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में खनन और परिवहन को प्रभावित किया। दूसरी ओर, मौजूदा मानसून सीजन में सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जबकि एल नीनो से जुड़ी गर्मी ने बिजली की मांग बढ़ा दी। गर्मी और उमस के कारण रात के समय भी खपत ऊंची बनी रही।

बिजली मांग और ग्रिड प्रबंधन की चुनौती

कोयला आधारित संयंत्र भारत की बिजली आपूर्ति का बड़ा आधार हैं, इसलिए ईंधन संकट का असर पूरे सिस्टम पर पड़ सकता है। इसी दबाव को देखते हुए केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने थर्मल पावर प्लांटों से कहा कि वे तयशुदा रखरखाव को टालें, ताकि मांग के समय उत्पादन में कमी न आए।

बिगमिंट के अनुसार, भारतीय बिजलीघरों में कुल कोयला भंडार जुलाई के अंत की तुलना में 19 प्रतिशत घटकर 30.95 मिलियन टन रह गया। यह लगभग 10 दिन के संचालन के लिए पर्याप्त था, लेकिन कुछ संयंत्रों में स्थिति इससे कहीं कमजोर थी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) भारत में बिजली क्षेत्र के आंकड़ों की निगरानी करने वाली वैधानिक संस्था है।
  • NTPC भारत की सबसे बड़ी ताप विद्युत उत्पादक कंपनी है।
  • थर्मल पावर स्टेशनों तक कोयला पहुंचाने के लिए रेलवे रेक का उपयोग किया जाता है।
  • कोयला आधारित बिजलीघर भारत की बिजली उत्पादन व्यवस्था का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं।

यह स्थिति दिखाती है कि बिजली उत्पादन में कोयला आपूर्ति, रेल लॉजिस्टिक्स और मौसम—तीनों का सीधा संबंध है। मांग बढ़ने और आपूर्ति धीमी होने पर भंडार तेजी से नीचे जा सकता है।

Originally written on August 27, 2026 and last modified on August 27, 2026.

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