नारियल निर्यात में उछाल से भारत की कृषि-आधारित कमाई को नई रफ्तार

नारियल निर्यात में उछाल से भारत की कृषि-आधारित कमाई को नई रफ्तार

भारत के नारियल उत्पाद निर्यात में वित्त वर्ष 2025-26 में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान निर्यात 62% बढ़कर 7,038.35 करोड़ रुपये यानी 794.70 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 4,349.03 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश बना हुआ है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 31.24% है।

नारियल अर्थव्यवस्था में मूल्यवर्धित उत्पादों की भूमिका

भारत में नारियल केवल एक कृषि फसल नहीं, बल्कि खाद्य, तेल, रेशा, खोल-आधारित उत्पादों और औद्योगिक उपयोगों से जुड़ा एक व्यापक आर्थिक क्षेत्र है। निर्यात में सबसे अधिक महत्व उन उत्पादों का है जिनमें मूल्यवर्धन किया गया हो। इनमें वर्जिन नारियल तेल, नारियल पानी, नारियल दूध और एक्टिवेटेड कार्बन शामिल हैं। ये उत्पाद खाद्य प्रसंस्करण, कॉस्मेटिक्स और औद्योगिक फिल्ट्रेशन जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इनकी मांग पारंपरिक नारियल उत्पादों की तुलना में अधिक मूल्य पैदा करती है।

दक्षिणी राज्यों का दबदबा और उत्पादन का केंद्र

भारत में नारियल उत्पादन मुख्य रूप से तटीय और दक्षिणी राज्यों में केंद्रित है। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश ने मिलकर देश के कुल नारियल उत्पादन का 91.11% हिस्सा दिया है। यही चार राज्य देश के नारियल बेल्ट का आधार हैं और खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण गतिविधियों में भी अग्रणी भूमिका निभाते हैं। इस क्षेत्रीय एकाग्रता का असर आपूर्ति, प्रसंस्करण क्षमता और निर्यात नेटवर्क पर भी पड़ता है।

संस्थागत समर्थन और सरकारी पहल

नारियल क्षेत्र के विकास के लिए नारियल विकास बोर्ड प्रमुख वैधानिक संस्था है। 31 जुलाई 2026 तक इस बोर्ड ने 8,700 नारियल उत्पाद निर्यातकों का पंजीकरण किया था। सरकार ने 2025-26 में बोर्ड की गतिविधियों के लिए 147.21 करोड़ रुपये आवंटित किए। इसके अलावा 2,175 हेक्टेयर में नई नारियल खेती की स्थापना और रखरखाव के लिए 632.77 लाख रुपये का उपयोग किया गया।

वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में 350 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ नारियल प्रोत्साहन योजना शुरू की गई। यह योजना उच्च-मूल्य कृषि विकास और नारियल क्षेत्र के विस्तार से जुड़ी है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार अब केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात क्षमता मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नारियल एक प्लांटेशन क्रॉप है और इसे उष्णकटिबंधीय बहुवर्षीय फसल माना जाता है।
  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है।
  • वर्जिन नारियल तेल, नारियल पानी और एक्टिवेटेड कार्बन नारियल-आधारित प्रमुख मूल्यवर्धित उत्पाद हैं।
  • नारियल विकास बोर्ड भारत में नारियल क्षेत्र के विकास की मुख्य संस्थागत इकाई है।

नारियल निर्यात में यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था अब कच्चे उत्पादन से आगे बढ़कर उच्च-मूल्य उत्पादों की ओर तेजी से बढ़ रही है। दक्षिणी राज्यों की मजबूत उत्पादन क्षमता और सरकारी समर्थन मिलकर इस क्षेत्र को निर्यात-आधारित विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे हैं।

Originally written on August 31, 2026 and last modified on August 31, 2026.

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