भारत की अंतरिक्ष संचार क्षमता को मिली नई रफ्तार

भारत की अंतरिक्ष संचार क्षमता को मिली नई रफ्तार

भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप एस्ट्रोगेट लैब्स ने देश का पहला स्वदेशी ऑप्टिकल इंटर-सैटेलाइट लिंक (OISL) टर्मिनल विकसित करने की घोषणा की है। यह तकनीक उपग्रहों के बीच सीधे लेज़र आधारित संचार को संभव बनाती है और अंतरिक्ष संचार को केवल स्पेस-टू-ग्राउंड लिंक से आगे बढ़ाकर इन-ऑर्बिट कनेक्टिविटी की दिशा में ले जाती है।

क्या है ऑप्टिकल इंटर-सैटेलाइट लिंक

OISL में उपग्रह एक-दूसरे से रेडियो तरंगों की बजाय प्रकाश, यानी लेज़र बीम, के जरिए संवाद करते हैं। यह व्यवस्था खास तौर पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) उपग्रह समूहों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जहां तेज डेटा ट्रांसफर, कम विलंबता और ग्राउंड स्टेशनों पर कम निर्भरता की जरूरत होती है।

LEO उपग्रह पृथ्वी से लगभग 160 किलोमीटर से 2,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करते हैं। ऐसे नेटवर्क में उपग्रहों के बीच सीधा और सुरक्षित संपर्क मिशन की दक्षता बढ़ाता है।

एस्ट्रोलिंक माइक्रो और परीक्षण की स्थिति

कंपनी ने कर्नाटक के बेंगलुरु इंटरनेशनल एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित 9वें बेंगलुरु स्पेस एक्सपो (BSX 2026) में अपने AstroLink Micro सिस्टम का प्रदर्शन किया। यह 10 Gbps क्षमता वाला स्पेस-टू-ग्राउंड लेज़र कम्युनिकेशन टर्मिनल है। कंपनी के अनुसार, नया OISL टर्मिनल 2027 तक पूर्ण फ्लाइट रेडीनेस के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है।

एस्ट्रोगेट लैब्स के स्पेस-टू-ग्राउंड लेज़र कम्युनिकेशन टर्मिनल टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल 8 (TRL 8) तक पहुंच चुके हैं। यह स्तर दर्शाता है कि तकनीक पूरी तरह विकसित और अंतरिक्ष उड़ान के लिए योग्य हो चुकी है।

भारत के अंतरिक्ष संचार तंत्र के लिए क्यों अहम

लेज़र कम्युनिकेशन सिस्टम उच्च गति से डेटा भेजने, कम देरी के साथ सूचना पहुंचाने और अधिक सुरक्षित लिंक उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। भविष्य में जब भारत और दुनिया में LEO आधारित उपग्रह नेटवर्क का विस्तार होगा, तब ऐसी स्वदेशी तकनीकें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होंगी।

एस्ट्रोगेट लैब्स को वह एकमात्र भारतीय कंपनी बताया गया है, जिसने स्वदेशी रूप से विकसित सैटेलाइट-टू-ग्राउंड लेज़र कम्युनिकेशन टर्मिनल इसरो को उपलब्ध कराया है। इसके अलावा, कंपनी ने यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के TeraNet मोबाइल ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन के साथ क्रॉस-कम्पैटिबिलिटी टेस्टिंग भी पूरी की है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ऑप्टिकल कम्युनिकेशन में डेटा भेजने के लिए रेडियो तरंगों की जगह लेज़र या प्रकाश का उपयोग किया जाता है।
  • लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) पृथ्वी के सबसे नजदीकी कक्षीय क्षेत्रों में से एक है, जहां कई संचार और पृथ्वी अवलोकन उपग्रह काम करते हैं।
  • टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) किसी तकनीक की परिपक्वता मापने का मानक है; TRL 8 का अर्थ है कि सिस्टम उड़ान के लिए प्रमाणित होने की स्थिति में है।
  • BSX 2026 का अर्थ 9वां बेंगलुरु स्पेस एक्सपो है, जिसका आयोजन बेंगलुरु इंटरनेशनल एग्जिबिशन सेंटर में हुआ।

स्वदेशी OISL टर्मिनल का विकास भारत की अंतरिक्ष संचार क्षमता को मजबूत करने वाला कदम है। यह भविष्य के उपग्रह नेटवर्क, सुरक्षित डेटा ट्रांसफर और अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर तकनीकी ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

Originally written on September 8, 2026 and last modified on September 8, 2026.

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