अरावली संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने तय की अंतिम समय-सीमा

अरावली संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने तय की अंतिम समय-सीमा

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला की परिभाषा तथा संरक्षण पर अंतिम रिपोर्ट देने के लिए उच्चस्तरीय समिति को 30 नवंबर 2026 तक का गैर-नवीननीय समय दिया है। अदालत ने साफ किया कि अब इस सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। समिति को अरावली क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं पर आधारित रिपोर्ट तैयार करनी है।

समिति को मिला सख्त निर्देश

पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन 25 मई 2026 को किया गया था, लेकिन वह अपनी मूल समय-सीमा 31 अगस्त 2026 तक रिपोर्ट नहीं दे सकी। सुनवाई के दौरान समिति ने छह महीने का अतिरिक्त समय 28 फरवरी 2027 तक मांगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने समिति को दिन-रात काम करने और जरूरत पड़ने पर मुद्दावार अंतरिम रिपोर्ट देने की अनुमति दी।

अरावली क्यों है इतनी अहम

अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत प्रणालियों में गिनी जाती है और यह राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली तथा गुजरात तक फैली हुई है। यह क्षेत्र भूमि क्षरण, खनन नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और वन संरक्षण जैसे मुद्दों से सीधे जुड़ा है। इसी कारण अदालत ने इसके वैज्ञानिक और पर्यावरणीय संरक्षण को लेकर स्पष्ट, ठोस और बहु-आयामी रिपोर्ट मांगी है।

रिपोर्ट में किन पहलुओं पर फोकस

समिति की अध्यक्षता भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की महानिदेशक कंचन देवी कर रही हैं। अदालत ने समिति को अरावली क्षेत्र से जुड़े स्थानिक, पारिस्थितिक, भूवैज्ञानिक, जलवैज्ञानिक और सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। साथ ही, समिति को राजस्थान और गुजरात के स्थानीय आदिवासी समुदायों सहित सभी हितधारकों की बात सुनने का निर्देश दिया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अरावली पर्वतमाला को दुनिया की सबसे प्राचीन वलित पर्वत प्रणालियों में से एक माना जाता है।
  • यह पर्वत श्रृंखला राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात से होकर गुजरती है।
  • भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) भारत सरकार के अधीन एक प्रमुख वानिकी अनुसंधान संस्थान है।
  • पर्यावरण और भूमि-उपयोग से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट विशेषज्ञ समितियां गठित कर सकता है।

अब 30 नवंबर 2026 की समय-सीमा के भीतर समिति की रिपोर्ट पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि अरावली का भविष्य खनन, पर्यावरण संरक्षण और जल-सुरक्षा जैसे बड़े सवालों से जुड़ा है। अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को तय की गई है।

Originally written on September 8, 2026 and last modified on September 8, 2026.

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