PM-SETU से आईटीआई क्लस्टरों के उन्नयन को 735.70 करोड़ की मंजूरी
कौशल विकास और रोजगार क्षमता बढ़ाने वाली पीएम-सेतु योजना के तहत राष्ट्रीय संचालन समिति ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के आईटीआई क्लस्टरों के लिए 735.70 करोड़ रुपये की रणनीतिक निवेश योजनाओं को मंजूरी दी है। इस मंजूरी के साथ योजना के तहत अब तक स्वीकृत कुल निवेश 2,171 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो नौ आईटीआई क्लस्टरों में वितरित होगा।
पीएम-सेतु योजना का उद्देश्य क्या है
पीएम-सेतु का पूरा नाम प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई है। यह योजना औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई के आधुनिकीकरण और उन्हें क्लस्टर मॉडल में विकसित करने पर केंद्रित है। इसका मकसद प्रशिक्षण ढांचे को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाना, कौशल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना है।
आईटीआई देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण का प्रमुख आधार हैं, जहां इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर जैसे ट्रेडों में कौशल आधारित शिक्षा दी जाती है। ऐसे में इस तरह के निवेश से न केवल भवन और उपकरणों का उन्नयन होता है, बल्कि प्रशिक्षण की समग्र क्षमता भी मजबूत होती है।
किन राज्यों को कितना निवेश मिला
स्वीकृत 735.70 करोड़ रुपये की राशि तीन क्लस्टरों में बांटी गई है। राजस्थान के भिवाड़ी क्लस्टर के लिए 241 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। तेलंगाना के मेडक्ल क्लस्टर को 254.30 करोड़ रुपये मिले हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ क्लस्टर के लिए 240.40 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।
इन तीनों क्लस्टरों में पांच-पांच आईटीआई शामिल हैं। राजस्थान योजना में गवर्नमेंट आईटीआई भिवाड़ी हब संस्थान के रूप में काम करेगा। उत्तर प्रदेश के मेरठ क्लस्टर में गवर्नमेंट आईटीआई साकेत, मेरठ हब संस्थान है। तेलंगाना के मेडक्ल क्लस्टर का प्रस्ताव ZEN Technologies Limited ने प्रस्तुत किया था।
क्लस्टर मॉडल और प्रशासनिक महत्व
पीएम-सेतु में क्लस्टर आधारित उन्नयन की व्यवस्था इसलिए अपनाई गई है ताकि एक हब संस्थान के जरिए आसपास के कई आईटीआई को साझा संसाधन, बेहतर प्रशिक्षण ढांचा और समन्वित विकास मिल सके। इससे अलग-अलग संस्थानों में बिखरे संसाधनों को एक संगठित ढांचे में जोड़ा जा सकता है।
इस योजना की 5वीं राष्ट्रीय संचालन समिति की बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबश्री मुखर्जी ने की। बैठक में स्वीकृत निवेश योजनाओं को आगे बढ़ाने और राज्यों के साथ क्रियान्वयन की प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईटीआई का पूरा नाम औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान है।
- कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय देश में राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रमों का नोडल मंत्रालय है।
- शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसमें संयुक्त परियोजना से जुड़े पक्षों के अधिकार और दायित्व तय किए जाते हैं।
- क्लस्टर आधारित आईटीआई उन्नयन में एक हब संस्थान के साथ कई संस्थानों को जोड़कर प्रशिक्षण और ढांचे का विकास किया जाता है।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में मिली यह मंजूरी दिखाती है कि सरकार अब कौशल प्रशिक्षण को केवल संस्थागत सुधार नहीं, बल्कि उद्योग-उन्मुख मानव संसाधन तैयार करने की रणनीति के रूप में आगे बढ़ा रही है।