केरल की अथिरा सुरेश बनीं भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट

केरल की अथिरा सुरेश बनीं भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट

केरल के कोझिकोड की अथिरा सुरेश 5 सितंबर 2026 को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन हुईं। उन्होंने बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में शॉर्ट सर्विस कमीशन टेक्निकल (महिला) कोर्स पूरा किया। उनकी यह उपलब्धि सैन्य सेवा, तकनीकी शिक्षा और चयन प्रक्रिया—तीनों के संगम को दर्शाती है।

गया की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी और शॉर्ट सर्विस कमीशन

ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, गया, भारतीय सेना के लिए अधिकारी तैयार करने वाले प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यहां शॉर्ट सर्विस कमीशन और अन्य प्रवेश योजनाओं के तहत प्रशिक्षण दिया जाता है। शॉर्ट सर्विस कमीशन भारतीय सशस्त्र बलों में सीमित अवधि की सेवा का अवसर देता है और इसका उपयोग कई शाखाओं तथा तकनीकी प्रविष्टियों में पुरुषों और महिलाओं, दोनों के लिए किया जाता है।

शिक्षा, करियर और चयन की कहानी

अथिरा सुरेश ने पहले आईआईटी-जेईई परीक्षा पास की थी। इसके बाद उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कालीकट से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। सेना में आने से पहले वे बेंगलुरु में एक्सॉनमोबिल के साथ प्रोजेक्ट कंट्रोल्स इंजीनियर के रूप में काम कर रही थीं। उन्होंने ओटीए गया के लिए सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड की प्रक्रिया अपने पहले ही प्रयास में पास की।

परिवार की सैन्य परंपरा और कमीशनिंग का महत्व

अथिरा का परिवार भी सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उनके पिता नायक सुरेश (सेवानिवृत्त) भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स में सेवा दे चुके हैं। उनके परिवार में तीन पीढ़ियों से सैन्य सेवा की परंपरा रही है। कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स भारतीय सेना की वह शाखा है जो सैन्य संचार व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालती है। 5 सितंबर 2026 को हुई कमीशनिंग परेड में दो सैन्य अकादमियों से कुल 595 नए अधिकारी सेना में शामिल हुए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, गया, बिहार में स्थित है और भारतीय सेना के अधिकारियों को प्रशिक्षित करती है।
  • शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत अधिकारी सीमित अवधि के लिए सेवा देते हैं।
  • सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड, अधिकारी चयन के लिए इंटरव्यू और मूल्यांकन प्रक्रिया आयोजित करता है।
  • कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स भारतीय सेना की संचार-सम्बंधी महत्वपूर्ण शाखा है।

अथिरा सुरेश की नियुक्ति यह दिखाती है कि तकनीकी शिक्षा, पेशेवर अनुभव और सैन्य अनुशासन मिलकर भारतीय सेना में नई पीढ़ी के अधिकारियों को तैयार कर रहे हैं।

Originally written on September 8, 2026 and last modified on September 8, 2026.

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