भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा को नई उड़ान, 2035 तक स्पेस स्टेशन की तैयारी
भारत ने अपने पहले अंतरिक्ष स्टेशन ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (Bharatiya Antariksha Station) की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है। इस परियोजना का पहला मॉड्यूल BAS-01 मंजूर किया जा चुका है और पूरी स्टेशन संरचना को 2035 तक पूरा करने की योजना है। यह पहल इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम से जुड़ी है और भारत को निम्न पृथ्वी कक्षा में दीर्घकालिक उपस्थिति की ओर ले जाती है।
क्या होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन
योजना के अनुसार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन लगभग 52 टन का होगा और इसे पृथ्वी से 400 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसमें तीन से चार अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रहने की व्यवस्था होगी, जो एक बार में तीन से छह महीने तक वहां रह सकेंगे। प्रस्तावित स्टेशन में कुल पांच मॉड्यूल होंगे, जिससे यह केवल प्रयोगशाला नहीं बल्कि दीर्घकालिक मानव उपस्थिति वाला अंतरिक्ष मंच बनेगा।
BAS-01 पर क्या हुआ है काम
स्टेशन के पहले मॉड्यूल BAS-01 के लिए बेसलाइन डिजाइन रिव्यू और सिस्टम इंजीनियरिंग का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ 31 बेसलाइन डिजाइन दस्तावेज भी जारी किए गए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गगनयान कार्यक्रम के दायरे को बढ़ाकर BAS-01 के विकास को मंजूरी दी है। इस मॉड्यूल के विकास और प्रक्षेपण पर लगभग 1,763 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसे 2025 से 2028 के बीच चार वर्षों में पूरा किया जाएगा।
गगनयान से जुड़ी बड़ी रणनीति
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान योजना का अगला चरण माना जा रहा है। गगनयान कार्यक्रम के तहत इसरो ने आठ मिशनों की योजना बनाई है, जिनमें प्रक्षेपण यान और उपग्रह मिशन शामिल हैं। इसी क्रम में पहला मानव रहित गगनयान मिशन इसी वर्ष के भीतर प्रस्तावित है। इससे भारत को अंतरिक्ष में मानव भेजने की तकनीक, सुरक्षा प्रणाली और मिशन प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन भारत का प्रस्तावित पहला स्पेस स्टेशन होगा।
- इसे 400 से 450 किलोमीटर की ऊंचाई वाली निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित करने की योजना है।
- प्रस्तावित स्टेशन में पांच मॉड्यूल और कुल 52 टन भार होगा।
- गगनयान भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जो इसरो के तहत संचालित है।
यह परियोजना भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को केवल उपग्रह प्रक्षेपण तक सीमित न रखकर दीर्घकालिक मानव मिशनों की ओर बढ़ाती है। BAS-01 की प्रगति आने वाले वर्षों में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है।