असमSAT से राज्य-स्तरीय उपग्रह निगरानी की नई शुरुआत
असम सरकार अपने प्रस्तावित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह तंत्र असमSAT के लिए निजी क्षेत्र के साझेदार के चयन के अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह परियोजना DBLOTT ढांचे के तहत विकसित की जा रही है, जिसका अर्थ है Design, Build, Launch, Operate, Train and Transfer। योजना के मुताबिक यह भारत का पहला राज्य-स्तरीय पृथ्वी अवलोकन सिस्टम हो सकता है, जिसका उपयोग बाढ़ निगरानी, कृषि सहायता और सीमा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
असमSAT क्यों अहम है
असम बाढ़-प्रवण राज्य है, इसलिए यहां समय पर और सटीक निगरानी की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। पृथ्वी अवलोकन उपग्रह भूमि, जल, वनस्पति, मौसम और निर्मित क्षेत्रों से जुड़ा डेटा रिमोट सेंसिंग के जरिए जुटाते हैं। इस डेटा की मदद से आपदा प्रबंधन, फसल आकलन और भू-आकृतिक मानचित्रण जैसे काम अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकते हैं।
असमSAT को इसी जरूरत के संदर्भ में देखा जा रहा है। यदि यह प्रणाली तय समय पर लागू होती है, तो राज्य को बाढ़ के दौरान रियल-टाइम जानकारी, कृषि क्षेत्र की निगरानी और सीमावर्ती इलाकों पर बेहतर नजर रखने में मदद मिल सकती है।
तकनीकी ढांचा और उपग्रहों की विशेषताएं
टेंडर दस्तावेजों के अनुसार, असमSAT के लिए कम से कम पांच लो अर्थ ऑर्बिट यानी LEO उपग्रहों के समूह की योजना है। LEO वे कक्षाएं होती हैं जो पृथ्वी की सतह से 2,000 किलोमीटर से कम ऊंचाई पर होती हैं। ऐसी कक्षा में उपग्रह पृथ्वी के अधिक निकट रहते हैं, जिससे अवलोकन अपेक्षाकृत अधिक सटीक हो सकता है।
इन उपग्रहों में Synthetic Aperture Radar यानी SAR पेलोड लगाने की योजना है। SAR तकनीक की खासियत यह है कि यह बादलों, बारिश और अंधेरे में भी उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरें ले सकती है। यही कारण है कि यह मानसून प्रभावित क्षेत्रों और आपदा-प्रवण इलाकों के लिए उपयोगी मानी जाती है।
संस्थागत भूमिका और प्रक्रिया
इस परियोजना की शुरुआती Expression of Interest यानी EoI असम साइंस टेक्नोलॉजी एंड एनवायरनमेंट काउंसिल, ASTEC, ने जारी की थी। EoI एक ऐसी खरीद प्रक्रिया है, जिसके जरिए किसी परियोजना के लिए योग्य कंपनियों की पहचान की जाती है।
परियोजना को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और IN-SPACe से संस्थागत समर्थन से भी जोड़ा गया है। IN-SPACe भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को विनियमित और प्रोत्साहित करने वाली संस्था है। असमSAT की EoI 16 मार्च 2026 को प्रकाशित हुई थी और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 28 मई 2026 थी। यह परियोजना 2025-26 के असम बजट प्रस्तुति के दौरान पहली बार सामने आई थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- LEO यानी Low Earth Orbit पृथ्वी से 2,000 किलोमीटर से कम ऊंचाई वाली कक्षा को कहा जाता है।
- SAR तकनीक बादलों और अंधेरे में भी चित्र लेने में सक्षम होती है।
- DBLOTT का पूरा रूप Design, Build, Launch, Operate, Train and Transfer है।
- ASTEC का पूरा नाम Assam Science Technology and Environment Council है।
असमSAT परियोजना राज्य-स्तरीय अंतरिक्ष उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो अन्य राज्य भी अपनी जरूरतों के अनुसार ऐसे पृथ्वी अवलोकन तंत्र विकसित करने पर विचार कर सकते हैं।