सिंगापुर में जीवित न्यूरॉन्स वाला बायोलॉजिकल डेटा सेंटर
सिंगापुर ने डेटा प्रोसेसिंग की दुनिया में एक अनोखा प्रयोग शुरू किया है, जिसमें जीवित मानव न्यूरॉन्स और सिलिकॉन हार्डवेयर को साथ जोड़कर एक बायोलॉजिकल डेटा सेंटर का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है। यह प्रणाली नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) के सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज में लॉन्च की गई और इसे भविष्य की कंप्यूटिंग दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बायोलॉजिकल कंप्यूटिंग क्या है
बायोलॉजिकल कंप्यूटिंग में गणना के लिए जीवित कोशिकाओं, जैव-अणुओं या जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। पारंपरिक कंप्यूटिंग जहां सिलिकॉन चिप्स पर आधारित होती है, वहीं इस तरह की व्यवस्था में जीवित जैविक सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर का संयोजन किया जाता है। इसी मिश्रित मॉडल को कई बार वेटवेयर भी कहा जाता है।
इस प्रोटोटाइप में स्टेम सेल से विकसित मानव न्यूरॉन्स का उपयोग किया गया है, जिन्हें सिलिकॉन सिस्टम से जोड़ा गया है ताकि वे डेटा प्रोसेसिंग में भाग ले सकें। यह प्रयोग कंप्यूटिंग के उस क्षेत्र से जुड़ा है, जहां मशीनों को मस्तिष्क जैसी कार्यप्रणाली के करीब लाने की कोशिश की जाती है।
प्रोटोटाइप की संरचना और संचालन
यह सिस्टम 20-यूनिट रैक पर आधारित है, जिसमें CL1 बायोलॉजिकल कंप्यूटिंग सिस्टम लगाए गए हैं। प्रत्येक CL1 यूनिट में लगभग 8 लाख न्यूरॉन्स हैं और पूरे रैक में करीब 1.6 करोड़ जीवित मानव न्यूरॉन्स उपयोग किए गए हैं।
इन कोशिकाओं को जीवित रखने के लिए नियमित लैब-मेंटेनेंस की जरूरत होती है। हर तीन दिन में शुगर, सूक्ष्म पोषक तत्वों और pH बफर्स का मिश्रण दिया जाता है। साथ ही, एक गैस-मिश्रण जीवन-समर्थन प्रणाली भी प्रयोगशाला सेटअप में कोशिकाओं को सहारा देती है। एक CL1 यूनिट लगभग 25 वॉट बिजली लेती है, जबकि पूरा रैक करीब 800 से 1000 वॉट तक खपत करता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रयोग
इस परियोजना का उद्देश्य केवल नई तकनीक दिखाना नहीं है, बल्कि ऐसे कंप्यूटिंग मॉडल विकसित करना भी है जो ऊर्जा की खपत कम करें और जैविक प्रणालियों की तरह काम करें। पारंपरिक डेटा सेंटरों में बिजली और कूलिंग की बड़ी जरूरत होती है, जबकि ग्रीन डेटा सेंटर नीतियां इन्हीं खर्चों और कार्बन उत्सर्जन को घटाने पर केंद्रित रहती हैं।
इस प्रोटोटाइप के संभावित उपयोगों में न्यूरो-इंस्पायर्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोमेडिकल मॉडलिंग, दवा खोज और न्यूरोलॉजिकल रोगों पर शोध शामिल हैं। हालांकि, अभी तक पारंपरिक प्रोसेसरों की तुलना में कार्य-प्रदर्शन प्रति वॉट के आधिकारिक बेंचमार्क जारी नहीं किए गए हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) सिंगापुर का एक प्रमुख सार्वजनिक शोध विश्वविद्यालय है।
- स्टेम सेल्स प्रयोगशाला परिस्थितियों में न्यूरॉन्स जैसी विशेष कोशिकाओं में बदल सकती हैं।
- आज के अधिकांश डेटा सेंटर और डिजिटल प्रोसेसर सिलिकॉन-आधारित तकनीक पर चलते हैं।
- ग्रीन डेटा सेंटर नीतियों का लक्ष्य बिजली खपत, कूलिंग जरूरत और कार्बन उत्सर्जन कम करना होता है।
सिंगापुर का यह प्रयोग दिखाता है कि भविष्य की कंप्यूटिंग केवल तेज़ प्रोसेसरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जीव विज्ञान और इलेक्ट्रॉनिक्स के मेल से नई संभावनाएं भी खुल सकती हैं।