भारत का पहला ऑफशोर एयरपोर्ट महाराष्ट्र में बनेगा: मुंबई महानगर क्षेत्र को मिलेगा नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

भारत का पहला ऑफशोर एयरपोर्ट महाराष्ट्र में बनेगा: मुंबई महानगर क्षेत्र को मिलेगा नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

भारत में विमानन अवसंरचना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र में देश के पहले ऑफशोर एयरपोर्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detailed Project Report – DPR) तैयार करने को मंजूरी मिल गई है। यह प्रस्तावित हवाई अड्डा पालघर जिले के कोरे बीच के निकट विकसित किया जाएगा और इसे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) का तीसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने की योजना है। यह परियोजना भविष्य में बढ़ती हवाई यातायात की मांग को पूरा करने के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी मजबूत करेगी।

ऑफशोर एयरपोर्ट क्या है?

ऑफशोर एयरपोर्ट वह हवाई अड्डा होता है, जिसे समुद्र तट के निकट समुद्र से पुनः प्राप्त भूमि (Reclaimed Land) या समुद्री संरचनाओं पर बनाया जाता है। ऐसे हवाई अड्डे सीमित भूमि वाले तटीय क्षेत्रों में विकसित किए जाते हैं, जहां पारंपरिक हवाई अड्डों के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होती। भारत का यह पहला ऑफशोर एयरपोर्ट आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करते हुए विकसित किया जाएगा और भविष्य की विमानन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर इसकी योजना बनाई गई है।

परियोजना का स्थान और योजना

प्रस्तावित एयरपोर्ट महाराष्ट्र के पालघर जिले में कोरे बीच के निकट स्थित होगा। परियोजना की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट में इसे व्यवहार्य (Feasible) माना गया है। इस परियोजना की निगरानी महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MADC) कर रहा है। इसे मुंबई महानगर क्षेत्र के तीसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे भविष्य में बढ़ते यात्री और कार्गो यातायात का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।

क्षमता और आधुनिक सुविधाएं

प्रस्तावित एयरपोर्ट में दो समानांतर रनवे (Parallel Runways) बनाए जाएंगे, जिससे अधिक संख्या में विमानों का संचालन संभव होगा। इसकी वार्षिक क्षमता लगभग 9 करोड़ (90 मिलियन) यात्रियों और 30 लाख मीट्रिक टन कार्गो के प्रबंधन की होगी। यह इसे भारत के सबसे बड़े और अत्याधुनिक हवाई अड्डों में शामिल करेगा।

बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क

इस परियोजना को विभिन्न प्रमुख परिवहन परियोजनाओं से जोड़ा जाएगा। एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी उत्तान-विरार सी लिंक, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशन तथा वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे से सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, इसे प्रस्तावित वधावन बंदरगाह (Vadhavan Port) से भी जोड़ा जाएगा, जिससे हवाई और समुद्री माल परिवहन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। यह व्यवस्था क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण बहु-माध्यम (Multimodal) लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने में सहायक होगी।

लागत और संभावित समय-सीमा

इस परियोजना की अनुमानित लागत को लेकर विभिन्न आधिकारिक और मीडिया स्रोतों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ स्रोत इसकी लागत लगभग 45,000 करोड़ रुपये, जबकि अन्य लगभग 76,220 करोड़ रुपये बताते हैं। निर्माण कार्य 2026 में शुरू होने की संभावना है और एयरपोर्ट के 2030 के शुरुआती वर्षों में परिचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पालघर जिला महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में स्थित है।
  • छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा वर्तमान में मुंबई का प्रमुख परिचालन हवाई अड्डा है।
  • ऑफशोर एयरपोर्ट समुद्र से पुनः प्राप्त भूमि या समुद्री संरचनाओं पर विकसित किए जाते हैं।
  • वधावन बंदरगाह महाराष्ट्र में विकसित की जा रही एक प्रमुख गहरे पानी (Deep-water) की बंदरगाह परियोजना है।

महाराष्ट्र में प्रस्तावित भारत का पहला ऑफशोर एयरपोर्ट देश की विमानन और परिवहन अवसंरचना के विकास में एक ऐतिहासिक पहल है। अत्याधुनिक डिजाइन, विशाल यात्री क्षमता, बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और आधुनिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के साथ यह परियोजना मुंबई महानगर क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ भारत की आर्थिक और परिवहन क्षमता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Originally written on June 29, 2026 and last modified on June 29, 2026.

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