भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच आठ समझौतों पर हस्ताक्षर
भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की 8 और 9 मई 2026 की दो दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आठ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों में पर्यटन, स्वास्थ्य, आयुर्वेद, शिक्षा, आधारभूत संरचना और वेक्टर नियंत्रण जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो संबंध
भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1962 में स्थापित हुए थे। इसी वर्ष त्रिनिदाद एवं टोबैगो को ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। यह देश कैरेबियन क्षेत्र का एक जुड़वां द्वीपीय गणराज्य है और कैरेबियन समुदाय यानी कैरिकॉम का सदस्य भी है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध भी काफी गहरे हैं, क्योंकि त्रिनिदाद एवं टोबैगो में भारतीय मूल की बड़ी आबादी निवास करती है।
समझौतों के प्रमुख क्षेत्र
हस्ताक्षरित समझौतों में त्रिनिदाद एवं टोबैगो के विदेश और कैरिकॉम मामलों के मंत्रालय भवन के सौर ऊर्जा आधारित आधुनिकीकरण की योजना शामिल है। इसके अलावा वेक्टर नियंत्रण, नेल्सन द्वीप के बुनियादी ढांचे के उन्नयन, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन सहयोग से जुड़े समझौते भी किए गए। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी और विकासात्मक सहयोग को बढ़ाना है।
आयुर्वेद और शिक्षा में सहयोग
समझौतों के तहत यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज में आयुर्वेद पर भारतीय चेयर स्थापित की जाएगी। आयुर्वेद भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है, जिसे भारत में आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है। इसके अलावा भारत ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो के स्कूली बच्चों को डिजिटल शिक्षा सहायता के तहत 2,000 लैपटॉप की पहली खेप भी सौंपी। यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी पहुंच को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में पहल
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने पेनल में राष्ट्रीय कृत्रिम अंग केंद्र का संयुक्त उद्घाटन किया। यह केंद्र अंग गंवाने वाले लोगों को कृत्रिम अंग और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही भारत की सहायता से स्थापित कृषि प्रसंस्करण इकाई का भी उद्घाटन किया गया। भारत ने पिछले वर्ष इस परियोजना के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य की मशीनरी उपलब्ध कराई थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- त्रिनिदाद एवं टोबैगो कैरिकॉम का सदस्य देश है।
- आयुर्वेद भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है जिसे आयुष मंत्रालय मान्यता देता है।
- समझौता ज्ञापन यानी एमओयू कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते।
- नेल्सन द्वीप त्रिनिदाद एवं टोबैगो का ऐतिहासिक महत्व वाला क्षेत्र है।
भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच हुए ये समझौते शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और आधारभूत विकास के क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देंगे। यह यात्रा दोनों देशों के मजबूत होते रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।