भारत-ओमान सीईपीए लागू, व्यापार को मिलेगा नया प्रोत्साहन
भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) 1 जून 2026 से प्रभावी हो गया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेवाओं और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके लागू होने से भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में व्यापक अवसर मिलेंगे, जबकि दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है।
सीईपीए क्या है और इसका महत्व
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी सीईपीए एक प्रकार का मुक्त व्यापार समझौता है, जो केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहता बल्कि सेवाओं, निवेश, व्यापार नियमों और पेशेवरों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों को भी शामिल करता है। भारत और ओमान के बीच लंबे समय से ऊर्जा, उर्वरक, धातु, वस्त्र, खाद्य उत्पाद और अन्य क्षेत्रों में व्यापारिक संबंध रहे हैं। नया समझौता इन संबंधों को और व्यापक बनाने का माध्यम बनेगा तथा दोनों देशों के उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करेगा।
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा लाभ
समझौते के तहत भारत को ओमान के बाजार में 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी। यह 2022-23 के औसत के आधार पर व्यापार मूल्य के लगभग 99.38 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। इससे भारतीय वस्त्र उद्योग, कृषि उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, रत्न एवं आभूषण, परिवहन उपकरण, दवा उद्योग, चिकित्सा उपकरण तथा सटीक उपकरणों के निर्यात को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। इन उत्पादों को ओमान में तत्काल शून्य शुल्क के साथ बाजार उपलब्ध होगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
ओमान को भी मिलेगी रियायतें
सीईपीए के तहत ओमान को भी भारतीय बाजार में महत्वपूर्ण व्यापारिक रियायतें प्राप्त होंगी। भारत ने अपनी कुल टैरिफ लाइनों के 77.79 प्रतिशत हिस्से पर रियायत देने का प्रावधान किया है, जो मूल्य के आधार पर ओमान से होने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। इससे दोनों देशों के बीच संतुलित व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और निवेश सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।
पेशेवरों की आवाजाही होगी आसान
समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय पेशेवरों को मिलने वाली सुविधा है। ओमान ने इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफरी की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी है। इसके अलावा व्यापारिक आगंतुकों और स्वतंत्र पेशेवरों के लिए अस्थायी प्रवेश प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। निर्यात से जुड़े आवश्यक प्रावधानों के तहत 1 जून 2026 से ओमान को भेजे जाने वाले उत्पादों के लिए वरीयता प्राप्त मूल प्रमाणपत्र ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफॉर्म के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं, जिससे व्यापार प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनेंगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सीईपीए का पूरा नाम व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता है।
- भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 11.18 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
- ओमान पश्चिम एशिया में स्थित एक महत्वपूर्ण देश है और खाड़ी क्षेत्र के व्यापारिक नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जाता है।
- वर्ष 2014 के बाद यह मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला पांचवां प्रमुख मुक्त व्यापार समझौता है।
भारत-ओमान सीईपीए दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला समझौता माना जा रहा है। इससे व्यापारिक अवसरों का विस्तार, निवेश प्रवाह में वृद्धि और पेशेवर सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। आने वाले वर्षों में यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।