दिल्ली सरकार ने शुरू की आफ्टरकेयर योजना
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 10 मई 2026 को युवाओं के लिए “आफ्टरकेयर योजना” की शुरुआत की। यह योजना उन युवाओं के लिए बनाई गई है जो 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद बाल देखभाल संस्थानों और अनाथालयों से बाहर आते हैं। दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 3.5 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस पहल का उद्देश्य ऐसे युवाओं को आत्मनिर्भर जीवन के लिए आवश्यक सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करना है ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
किशोर न्याय कानून के तहत योजना
यह योजना किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत संचालित की जाएगी। दिल्ली का महिला एवं बाल विकास विभाग इस योजना को लागू करेगा। कानून में आफ्टरकेयर प्रावधान उन युवाओं के लिए बनाए गए हैं जो 18 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं और जिन्हें स्वतंत्र जीवन शुरू करने के लिए अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होती है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, रोजगार और सामाजिक पुनर्वास के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाना है।
योजना के लाभ और सहायता
योजना के अंतर्गत पात्र युवाओं को उच्च शिक्षा, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही लाभार्थियों को मासिक वजीफा, मेंटरशिप, काउंसलिंग, करियर मार्गदर्शन और पुनर्वास सहायता भी दी जाएगी। प्रत्येक लाभार्थी की जरूरतों का आकलन कर उसके लिए व्यक्तिगत देखभाल योजना तैयार की जाएगी, जिससे सहायता अधिक प्रभावी और उपयोगी बन सके।
संस्थागत व्यवस्था और निगरानी
योजना के संचालन और निगरानी के लिए राज्य स्तर पर आफ्टरकेयर समिति गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव करेंगे। इसके अलावा जिला स्तर पर भी समितियां बनाई जाएंगी। दिल्ली में वर्तमान में 88 चाइल्ड केयर संस्थान कार्यरत हैं और हर वर्ष लगभग 150 से 200 युवा इन संस्थानों से बाहर आते हैं। राजधानी में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग दो आफ्टरकेयर होम भी मौजूद हैं, जहां आवास, भोजन और शिक्षा संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
सामाजिक महत्व
यह योजना उन युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिनके पास पारिवारिक सहयोग नहीं होता। कई बार संस्थानों से बाहर आने के बाद ऐसे युवाओं को शिक्षा, नौकरी और रहने की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आफ्टरकेयर योजना उन्हें सुरक्षित वातावरण और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 भारत में बाल संरक्षण का प्रमुख कानून है।
- आफ्टरकेयर सहायता सामान्यतः 18 वर्ष की आयु के बाद शुरू होती है।
- दिल्ली में कुल 88 चाइल्ड केयर संस्थान कार्यरत हैं।
- महिला एवं बाल विकास विभाग विभिन्न बाल कल्याण और पुनर्वास योजनाओं का संचालन करता है।
दिल्ली सरकार की यह पहल बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे संस्थानों से बाहर आने वाले युवाओं को बेहतर भविष्य और आत्मनिर्भर जीवन की नई उम्मीद मिलेगी।