भारत और जापान ने रक्षा सह-विकास समझौते पर किए हस्ताक्षर
भारत और जापान ने 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान अपने पहले रक्षा सह-विकास (डिफेंस को-डेवलपमेंट) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत दोनों देश नौसैनिक प्लेटफॉर्म के लिए नेवल रेडियो एंटीना ‘यूनिकॉर्न’ (यूएनआईकॉर्न मस्त) का संयुक्त रूप से विकास करेंगे। यह समझौता भारत-जापान रक्षा सहयोग में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।
रक्षा सह-विकास समझौते का महत्व
रक्षा सह-विकास वह व्यवस्था है जिसमें दो देश मिलकर किसी सैन्य प्रणाली, उपकरण या रक्षा प्लेटफॉर्म का संयुक्त विकास करते हैं। इसका उद्देश्य तकनीकी विशेषज्ञता साझा करना, लागत कम करना तथा रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना होता है। भारत और जापान के बीच यह पहला रक्षा सह-विकास समझौता है, जो समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और रणनीतिक स्वायत्तता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देगा।
यूनिकॉर्न मस्त क्या है?
यूनिकॉर्न (यूएनआईकॉर्न) का पूरा नाम यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना है। यह आधुनिक नौसैनिक युद्धपोतों के लिए विकसित एक उन्नत एंटीना प्रणाली है, जिसमें कई अलग-अलग एंटीना को एक ही संरचना में एकीकृत किया जाता है। इससे युद्धपोत की स्टेल्थ क्षमता बढ़ती है, क्योंकि बाहरी एंटीना की संख्या कम होने से रडार पर उसकी पहचान करना कठिन हो जाता है। यह प्रणाली संचार, रडार और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा आधुनिक नौसेनाओं की परिचालन क्षमता को बेहतर बनाती है।
भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी
समझौते की घोषणा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संयुक्त रूप से की। शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आर्थिक सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इससे स्पष्ट है कि भारत और जापान की साझेदारी केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक और आर्थिक विकास के अनेक क्षेत्रों तक विस्तारित हो रही है।
रक्षा निर्यात और भविष्य की संभावनाएं
यूनिकॉर्न मस्त का संयुक्त विकास जापान की रक्षा निर्यात नीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक जापान ने सैन्य उपकरणों के निर्यात पर स्वयं लगाए गए प्रतिबंधों का पालन किया था। हालांकि हाल के वर्षों में उसने अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए भरोसेमंद साझेदार देशों के साथ रक्षा सहयोग को बढ़ावा दिया है। भारत और जापान के बीच नियमित रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठकों और संस्थागत संवाद ने इस सहयोग को मजबूत आधार प्रदान किया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 16वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
- भारत और जापान की पहली रक्षा सह-विकास परियोजना नेवल रेडियो एंटीना ‘यूनिकॉर्न’ (यूएनआईकॉर्न मस्त) से संबंधित है।
- यूनिकॉर्न मस्त के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ इम्प्लीमेंटेशन) पर नवंबर 2024 में टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में हस्ताक्षर किए गए थे।
- तीसरी भारत-जापान ‘2+2’ विदेश एवं रक्षा मंत्रियों की बैठक अगस्त 2024 में आयोजित की गई थी।
भारत और जापान के बीच हुआ यह रक्षा सह-विकास समझौता दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करेगा। यूनिकॉर्न मस्त जैसी उन्नत तकनीक का संयुक्त विकास समुद्री सुरक्षा, रक्षा नवाचार और स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग और साझा सुरक्षा हितों का भी प्रतीक है।