एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित बने भारतीय वायुसेना के 51वें वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ
भारतीय वायुसेना में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के तहत एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 1 जुलाई 2026 को 51वें वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ (वीसीएएस) का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने एयर मार्शल नागेश कपूर का स्थान लिया, जो लगभग चार दशकों की शानदार सेवा के बाद 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुए। यह नियुक्ति भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण, संयुक्त सैन्य समन्वय और भविष्य की रक्षा रणनीतियों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ का महत्व
वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ भारतीय वायुसेना का वरिष्ठ तीन-स्टार रैंक का पद होता है। यह अधिकारी वायुसेना प्रमुख के अधीन कार्य करता है और नई दिल्ली स्थित एयर मुख्यालय की प्रमुख प्रशासनिक एवं परिचालन संरचना का हिस्सा होता है। इस पद की जिम्मेदारी वायुसेना की संचालन क्षमता, योजनाओं और संगठनात्मक समन्वय को मजबूत बनाए रखना है।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का सैन्य करियर
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं तथा क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने 20 से अधिक प्रकार के विमानों पर 3,300 घंटे से अधिक उड़ान भरी है। इनमें मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर जैसे प्रमुख लड़ाकू विमान शामिल हैं। उनकी विशेषज्ञता उड़ान प्रशिक्षण, परीक्षण और परिचालन नेतृत्व के क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है।
त्रि-सेवा समन्वय में अहम भूमिका
वाइस चीफ बनने से पहले एयर मार्शल दीक्षित 1 मई 2025 से 30 जून 2026 तक चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर कार्यरत रहे। इस दौरान उन्होंने भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त संचालन एवं समन्वय को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्यकाल में संयुक्त सैन्य सिद्धांतों के विकास, रणसंवाद 2025 एवं 2026, संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन तथा ‘डिफेंस फोर्सेज विजन 2047’ जैसी प्रमुख पहलों में सक्रिय भूमिका रही।
सम्मान और उपलब्धियां
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को उनके उत्कृष्ट सैन्य योगदान के लिए अति विशिष्ट सेवा पदक, वायु सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक तथा परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2026 के रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक प्रदान किया, जो शांतिकाल में उत्कृष्ट विशिष्ट सेवा के लिए भारत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी।
- वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ भारतीय वायुसेना के सर्वोच्च परिचालन पदों में से एक माना जाता है।
- राष्ट्रीय रक्षा अकादमी महाराष्ट्र के खड़कवासला में स्थित है।
- परम विशिष्ट सेवा पदक भारत का शांतिकाल में विशिष्ट सेवाओं के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य अलंकरणों में से एक है।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय वायुसेना आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा क्षमता और त्रि-सेवा एकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उनका व्यापक परिचालन अनुभव, रणनीतिक नेतृत्व और संयुक्त सैन्य ढांचे में योगदान आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना की क्षमता और दक्षता को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।