रिमपैक 2026 में भारतीय नौसेना की पी-8आई विमान तैनाती

रिमपैक 2026 में भारतीय नौसेना की पी-8आई विमान तैनाती

भारतीय नौसेना ने दुनिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय समुद्री सैन्य अभ्यास रिमपैक (रिम ऑफ द पैसिफिक) 2026 में भागीदारी के तहत अपने लंबी दूरी के समुद्री टोही एवं पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान पी-8आई को हवाई भेजा है। यह तैनाती हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती सामरिक भूमिका, समुद्री सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता तथा मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस अभ्यास का आयोजन 24 जून 2026 से 31 जुलाई 2026 तक संयुक्त आधार पर्ल हार्बर-हिकम, हवाई (अमेरिका) में किया जा रहा है।

रिमपैक 2026 क्या है?

रिमपैक का पूरा नाम ‘रिम ऑफ द पैसिफिक’ है। यह एक द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसकी मेजबानी अमेरिकी प्रशांत बेड़ा करता है। वर्ष 2026 में इसका 30वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास में लगभग 30 से 31 देशों की नौसेनाएं भाग ले रही हैं। इसके अलावा 30 से 40 युद्धपोत, पांच पनडुब्बियां, 140 से 206 से अधिक सैन्य विमान तथा लगभग 25,000 से 30,000 सैन्य कर्मी इसमें शामिल हैं। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य संचालन और विभिन्न देशों के बीच समन्वय को मजबूत करना है।

पी-8आई विमान की विशेषताएं

पी-8आई भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक समुद्री गश्ती एवं पनडुब्बी रोधी विमान है, जिसे बोइंग ने विशेष रूप से भारत के लिए विकसित किया है। यह विमान लंबी दूरी तक समुद्री निगरानी, दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, खुफिया जानकारी जुटाने तथा सहयोगी नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभियानों को सफलतापूर्वक संचालित करने में सक्षम है। यह बोइंग पी-8 पोसाइडन प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसका उपयोग दुनिया के कई देशों की नौसेनाएं करती हैं।

रिमपैक में भारत की भूमिका

भारत ने पहली बार वर्ष 2014 में रिमपैक अभ्यास में भाग लिया था। इसके बाद से भारतीय नौसेना प्रत्येक संस्करण में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। इस अभ्यास के माध्यम से भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने, साझा सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और मित्र देशों के साथ परिचालन क्षमता विकसित करने का अवसर प्राप्त करता है। रिमपैक 2026 में पोलैंड, स्पेन, ग्वाटेमाला, ग्रीस और फिजी जैसे नए देशों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है, जिससे इस अभ्यास का वैश्विक महत्व और अधिक बढ़ गया है।

कमांड संरचना और रणनीतिक महत्व

रिमपैक 2026 का नेतृत्व अमेरिकी नौसेना के वाइस एडमिरल जेफ जैब्लॉन कर रहे हैं। अभ्यास की कमांड संरचना में चिली के कमोडोर उप कमांडर, जापान के रियर एडमिरल वाइस कमांडर, दक्षिण कोरिया के रियर एडमिरल समुद्री घटक प्रमुख तथा कनाडा के ब्रिगेडियर जनरल वायु घटक प्रमुख के रूप में शामिल हैं। इस बार अभ्यास की थीम “पार्टनर्स: इंटीग्रेटेड एंड प्रिपेयर्ड” रखी गई है, जिसका उद्देश्य साझेदारी, सामूहिक तैयारी और मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रिमपैक दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समुद्री सैन्य अभ्यास माना जाता है।
  • इसका आयोजन प्रत्येक दो वर्ष में प्रशांत महासागर क्षेत्र में किया जाता है।
  • संयुक्त आधार पर्ल हार्बर-हिकम हवाई, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है।
  • पी-8आई विमान बोइंग पी-8 पोसाइडन प्लेटफॉर्म पर आधारित भारतीय नौसेना का प्रमुख समुद्री गश्ती विमान है।

भारतीय नौसेना की रिमपैक 2026 में सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। पी-8आई जैसे आधुनिक विमान की तैनाती न केवल भारत की समुद्री निगरानी क्षमता को प्रदर्शित करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग और सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।

Originally written on July 3, 2026 and last modified on July 3, 2026.

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