भारत और इटली के बीच बना विशेष रणनीतिक साझेदारी संबंध
भारत और इटली ने 20 मई 2026 को अपने द्विपक्षीय संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” यानी विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने की घोषणा की। यह घोषणा रोम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई वार्ता के दौरान की गई। नई साझेदारी के तहत दोनों देश रक्षा, व्यापार, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। इसे भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत-इटली संबंधों का इतिहास
भारत और इटली के बीच कूटनीतिक संबंध भारत की स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1947 में स्थापित हुए थे। इटली यूरोपीय संघ और जी7 समूह का सदस्य देश है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, संस्कृति और बहुपक्षीय मंचों पर लंबे समय से सहयोग जारी है। भारत और इटली ने संयुक्त आयोगों और मंत्रीस्तरीय बैठकों के माध्यम से नियमित राजनीतिक संवाद बनाए रखा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में आर्थिक और तकनीकी सहयोग का महत्व तेजी से बढ़ा है।
संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029
भारत और इटली ने “इंडिया-इटली जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029” भी तैयार किया है। यह पांच वर्षीय योजना दोनों देशों के बीच सहयोग को व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का ढांचा प्रदान करती है। इस योजना में रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और नवाचार जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है।
उभरते क्षेत्रों में सहयोग
20 मई 2026 की वार्ता के दौरान दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। वर्तमान में 400 से अधिक इतालवी कंपनियां भारत में सक्रिय हैं। ये कंपनियां विनिर्माण, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और डिजाइन क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। इसके अलावा “माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट” के तहत छात्रों, पेशेवरों और श्रमिकों की आवाजाही को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे शिक्षा और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है।
रणनीतिक और वैश्विक महत्व
भारत और इटली दोनों ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे पर भी चर्चा की। यह प्रस्तावित परियोजना भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप को बेहतर संपर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और इटली की नई रणनीतिक साझेदारी वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग में दोनों देशों की भूमिका को मजबूत करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 20 मई 2026 की रोम यात्रा पिछले 26 वर्षों में इटली की पहली द्विपक्षीय यात्रा मानी जा रही है। इससे पहले उन्होंने जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन और अक्टूबर 2021 में जी20 बैठक में भाग लिया था। यह यात्रा भारत और इटली के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास और सहयोग का संकेत मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रोम इटली की राजधानी है और वहीं भारत-इटली वार्ता आयोजित हुई थी।
- जी7 सात विकसित अर्थव्यवस्थाओं का अंतरसरकारी समूह है, जिसमें इटली शामिल है।
- भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा एक प्रस्तावित वैश्विक संपर्क परियोजना है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा उभरते उच्च-मूल्य सहयोग क्षेत्र माने जाते हैं।
भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। इससे व्यापार, तकनीक, शिक्षा और वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद है।