दो या तीन सूर्यों वाले ग्रहों पर कैसी हो सकती है वनस्पति?
ब्रह्मांड में जीवन की संभावनाओं की खोज लगातार वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का विषय रही है। इसी दिशा में किए गए शोधों ने यह सवाल उठाया है कि यदि किसी ग्रह पर एक के बजाय दो या तीन सूर्य हों, तो वहां की वनस्पति और सूक्ष्मजीव कैसे विकसित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे ग्रहों पर प्रकाश की तीव्रता, रंग और पराबैंगनी विकिरण का स्तर पृथ्वी से काफी अलग हो सकता है, जिसके कारण वहां के पौधों की संरचना, रंग और जीवन-रणनीतियां भी अनोखी हो सकती हैं।
क्या होते हैं सर्कम्बाइनरी ग्रह?
सर्कम्बाइनरी ग्रह वे ग्रह होते हैं जो एक नहीं बल्कि दो तारों की परिक्रमा करते हैं। इन्हें द्वितारा प्रणाली वाले ग्रह भी कहा जाता है और खगोल विज्ञान में इन्हें एक्सोप्लैनेट्स की एक मान्य श्रेणी माना जाता है। वर्ष 2011 में स्कॉटलैंड के सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जैक ओ’मैली-जेम्स ने एक अध्ययन प्रस्तुत किया था, जिसमें दो या तीन तारों वाले ग्रहों पर संभावित जीवन और वनस्पति के स्वरूप का विश्लेषण किया गया था। अध्ययन में सुझाव दिया गया कि कुछ परिस्थितियों में वहां के पौधों की पत्तियां काली या धूसर रंग की हो सकती हैं।
तारों के प्रकाश का पौधों पर प्रभाव
प्रकाश संश्लेषण पूरी तरह उस प्रकाश पर निर्भर करता है जो किसी ग्रह को उसके तारे से प्राप्त होता है। यदि ग्रह लाल बौने तारों के आसपास स्थित हो, तो वहां उपलब्ध प्रकाश अपेक्षाकृत कम और अलग तरंगदैर्घ्य वाला होगा। ऐसी स्थिति में पौधे अधिक प्रकाश अवशोषित करने के लिए गहरे रंग की पत्तियां विकसित कर सकते हैं। काली या गहरी धूसर पत्तियां अधिक ऊर्जा संग्रहित करने में सक्षम हो सकती हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके।
पराबैंगनी विकिरण से बचाव की रणनीति
यदि किसी ग्रह पर दो सूर्य जैसे चमकीले तारे हों, तो वहां पराबैंगनी विकिरण का स्तर अधिक हो सकता है। ऐसे वातावरण में जीवित रहने के लिए पौधों और सूक्ष्मजीवों को विशेष सुरक्षात्मक तंत्र विकसित करने पड़ सकते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ऐसे जीव प्राकृतिक “सनस्क्रीन” जैसे रसायन विकसित कर सकते हैं, जो हानिकारक विकिरण से उनकी रक्षा करेंगे। इसके अलावा, प्रकाश संश्लेषण करने वाले सूक्ष्मजीव अचानक होने वाली सौर ज्वालाओं के दौरान सुरक्षित स्थानों की ओर गति करने की क्षमता भी विकसित कर सकते हैं।
बहु-तारा प्रणालियों में जीवन की संभावनाएं
द्वितारा और बहु-तारा प्रणालियां ब्रह्मांड में काफी सामान्य हैं। अनुमान है कि सूर्य जैसे 25 प्रतिशत से अधिक तारे और लगभग 50 प्रतिशत लाल बौने तारे बहु-तारा प्रणालियों का हिस्सा हैं। मई 2026 में खगोलविदों ने 27 नए संभावित सर्कम्बाइनरी ग्रहों की पहचान की, जिससे ऐसे ग्रहों की संख्या और बढ़ गई है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल रही है कि अलग-अलग प्रकाशीय परिस्थितियों में जीवन किस प्रकार अनुकूलन कर सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सर्कम्बाइनरी ग्रह दो तारों की परिक्रमा करने वाले एक्सोप्लैनेट्स होते हैं।
- लाल बौने तारे सूर्य की तुलना में छोटे, ठंडे और कम चमकदार होते हैं।
- सौर ज्वालाएं तारों से निकलने वाली ऊर्जा और विकिरण की अचानक तीव्र घटनाएं होती हैं।
- एस्ट्रोबायोलॉजी वह विज्ञान है जो ब्रह्मांड में जीवन की उत्पत्ति, विकास और संभावित अस्तित्व का अध्ययन करता है।
दो या तीन सूर्यों वाले ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं से जुड़ा यह शोध मानव ज्ञान की सीमाओं को विस्तारित कर रहा है। ऐसे अध्ययनों से यह समझने में सहायता मिलती है कि पृथ्वी के बाहर जीवन किन-किन रूपों में विकसित हो सकता है। भविष्य में एक्सोप्लैनेट अनुसंधान और उन्नत अंतरिक्ष मिशन इस रहस्य को और गहराई से समझने का अवसर प्रदान करेंगे, जिससे ब्रह्मांड में जीवन की खोज को नई दिशा मिल सकती है।