भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मिलेगा बड़ा विस्तार

भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मिलेगा बड़ा विस्तार

भारत सरकार देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी उद्देश्य से शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) को अब दूसरे चरण में विस्तारित करने की तैयारी चल रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के बजट के साथ इस मिशन को मंजूरी दी थी। मई 2026 तक इस मिशन के तहत लगभग ₹1.64 लाख करोड़ निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर निर्माण और पैकेजिंग परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है।

क्या है इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का उद्देश्य देश में चिप निर्माण, पैकेजिंग और डिजाइनिंग को बढ़ावा देना है ताकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक की आधारशिला माने जाते हैं और इनका उपयोग मोबाइल, कंप्यूटर, वाहन, रक्षा उपकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों में होता है। सरकार अब मिशन के दूसरे चरण यानी आईएसएम 2.0 को 5 वर्षों से बढ़ाकर 12 वर्षों तक विस्तारित करने पर विचार कर रही है। इसका कारण यह है कि सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश और उत्पादन परियोजनाओं को विकसित होने में लंबा समय लगता है।

बढ़ सकता है मिशन का बजट

आईएसएम 2.0 के लिए लगभग ₹1.5 लाख करोड़ के बड़े बजट का अनुमान लगाया जा रहा है। पहले चरण में सरकार ने लगभग 10 अरब डॉलर का प्रोत्साहन पैकेज दिया था। हालांकि दूसरे चरण में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, ओएसएटी और एटीएमपी इकाइयों के लिए प्रोत्साहन सहायता 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत किए जाने की संभावना है। केंद्रीय बजट 2026-27 में आईएसएम 2.0 के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें उद्योग आधारित अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि तकनीकी विकास और कुशल मानव संसाधन तैयार किए जा सकें।

सेमीकंडक्टर उद्योग का व्यापक दायरा

आईएसएम 2.0 के तहत सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, चिप डिजाइन, कच्चे माल और घरेलू डिजाइन कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा। प्रस्तावित ढांचे में गैस, इंगट निर्माण और बौद्धिक संपदा अधिकारों को भारत में बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन वह प्रक्रिया है जिसमें सिलिकॉन वेफर पर इंटीग्रेटेड सर्किट बनाए जाते हैं। वहीं ओएसएटी का अर्थ आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्टिंग और एटीएमपी का अर्थ असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग होता है।

नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

मई 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लगभग ₹4,000 करोड़ की दो नई सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी। क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड गुजरात में गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर वेफर परियोजना स्थापित करेगी, जबकि सूची सेमीकॉन लिमिटेड सेमीकंडक्टर चिप पैकेजिंग परियोजना शुरू करेगी। इससे पहले माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने जून 2023 में गुजरात के साणंद में 2.75 अरब डॉलर की एटीएमपी सुविधा स्थापित करने की घोषणा की थी। वहीं टाटा समूह और पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन की ₹91,000 करोड़ की परियोजना को भी मंजूरी मिल चुकी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी गई थी।
  • माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने गुजरात के साणंद में 2.75 अरब डॉलर की एटीएमपी परियोजना की घोषणा की थी।
  • गैलियम नाइट्राइड एक वाइड-बैंडगैप सेमीकंडक्टर पदार्थ है जिसका उपयोग पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है।
  • ओएसएटी और एटीएमपी सेमीकंडक्टर उद्योग की महत्वपूर्ण असेंबली और पैकेजिंग प्रक्रियाएं हैं।

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आईएसएम 2.0 के विस्तार से भारत में निवेश, तकनीकी विकास और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की संभावना है।

Originally written on May 21, 2026 and last modified on May 21, 2026.

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