कोलकाता पोर्ट के कंटेनर टर्मिनल विकास का ठेका जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला

कोलकाता पोर्ट के कंटेनर टर्मिनल विकास का ठेका जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला

भारत के बंदरगाह क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर को कोलकाता डॉक सिस्टम के नेताजी सुभाष डॉक में बड़े विकास कार्यों के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड प्रदान किया गया है। 9 जून 2026 को स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट प्राधिकरण द्वारा जारी इस परियोजना का कुल मूल्य 832.25 करोड़ रुपये है। यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) व्यवस्था में 30 वर्षों के लिए संचालित की जाएगी।

नेताजी सुभाष डॉक में होगा व्यापक विकास

इस परियोजना के अंतर्गत दो नए बाहरी कंटेनर हैंडलिंग बर्थ विकसित किए जाएंगे, जबकि मौजूदा पांच बर्थों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। नेताजी सुभाष डॉक, कोलकाता डॉक सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है और पूर्वी भारत के प्रमुख समुद्री व्यापार केंद्रों में से एक माना जाता है। इस विकास कार्य का उद्देश्य कंटेनर और बहुउद्देशीय माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाना तथा संचालन को अधिक आधुनिक और दक्ष बनाना है।

बढ़ेगी कंटेनर हैंडलिंग क्षमता

नई परियोजना से लगभग 0.93 मिलियन टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) की अतिरिक्त कंटेनर और बहुउद्देशीय कार्गो क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। यह क्षमता लगभग 13 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई के बराबर मानी जाती है। इससे पहले भी जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर को नेताजी सुभाष डॉक में बर्थ-8 के पुनर्निर्माण तथा बर्थ-7 और 8 के मशीनीकरण का कार्य मिला था, जिससे 0.45 मिलियन टीईयू अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की संभावना है।

आधुनिक तकनीक से होगा संचालन

परियोजना के तहत पुराने मोबाइल हार्बर क्रेनों को हटाकर आधुनिक रेल-माउंटेड क्वे क्रेनों की स्थापना की जाएगी। ये क्रेन कंटेनर टर्मिनलों में जहाज से तट तक माल की तेज और कुशल ढुलाई के लिए उपयोग की जाती हैं। दुनिया के कई बड़े बंदरगाहों में इसी प्रकार की मशीनीकृत प्रणालियां अपनाई जाती हैं, जिससे समय और लागत दोनों में कमी आती है।

पीपीपी मॉडल का महत्व

डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए व्यापक रूप से अपनाया जाता है। इस मॉडल में निजी कंपनी परियोजना में निवेश करती है, उसका संचालन करती है और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद परिसंपत्ति को संबंधित सरकारी प्राधिकरण को हस्तांतरित कर देती है। इससे सरकारी संसाधनों पर दबाव कम होता है और निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ मिलता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नेताजी सुभाष डॉक, कोलकाता डॉक सिस्टम का हिस्सा है जो स्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित होता है।
  • टीईयू (Twenty-foot Equivalent Unit) बंदरगाहों में कंटेनर क्षमता मापने की मानक इकाई है।
  • रेल-माउंटेड क्वे क्रेन बड़े कंटेनर टर्मिनलों में उच्च क्षमता वाले माल संचालन के लिए उपयोग की जाती हैं।
  • भारत में कई बंदरगाह परियोजनाएं सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत विकसित की जाती हैं।

कोलकाता डॉक सिस्टम में यह नई परियोजना भारत के समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आधुनिक तकनीक, बढ़ी हुई क्षमता और बेहतर बुनियादी ढांचे के माध्यम से यह परियोजना पूर्वी भारत के व्यापारिक नेटवर्क को नई गति प्रदान करेगी। साथ ही, यह देश के बंदरगाह आधुनिकीकरण कार्यक्रम और वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा को भी मजबूती देने में सहायक सिद्ध होगी।

Originally written on June 10, 2026 and last modified on June 10, 2026.

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