भारतीय मूल के वैज्ञानिकों को दक्षिण अफ्रीका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
भारतीय मूल के प्रसिद्ध सार्वजनिक स्वास्थ्य वैज्ञानिक प्रोफेसर सलीम अब्दूल करीम और प्रोफेसर कीर्तन धेड़ा को दक्षिण अफ्रीका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान 20 मई 2026 को प्रिटोरिया में आयोजित एक औपचारिक समारोह में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने प्रदान किया। दोनों वैज्ञानिकों को चिकित्सा विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया।
क्या है ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे
ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे दक्षिण अफ्रीका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार उन नागरिकों को दिया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हों और जिनके कार्यों से दक्षिण अफ्रीका तथा वैश्विक समाज को लाभ पहुंचा हो। इस सम्मान की विभिन्न श्रेणियां होती हैं, जिनमें गोल्ड और सिल्वर प्रमुख हैं। यह पुरस्कार विज्ञान, संस्कृति, खेल, चिकित्सा और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
प्रोफेसर सलीम अब्दूल करीम का योगदान
प्रोफेसर सलीम अब्दूल करीम को चिकित्सा विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उनके योगदान के लिए “ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे इन गोल्ड” से सम्मानित किया गया। उनका शोध मुख्य रूप से एचआईवी/एड्स और तपेदिक यानी टीबी महामारी विज्ञान पर केंद्रित रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में वैज्ञानिक नेतृत्व प्रदान किया और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे दक्षिण अफ्रीका में एड्स अनुसंधान कार्यक्रम केंद्र यानी कैप्रिसा के निदेशक हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ क्वाजुलु-नटाल में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
प्रोफेसर कीर्तन धेड़ा की उपलब्धियां
प्रोफेसर कीर्तन धेड़ा को फुफ्फुसीय चिकित्सा यानी पल्मोनोलॉजी में उनके शोध के लिए “ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे इन सिल्वर” प्रदान किया गया। उनका कार्य मुख्य रूप से तपेदिक और दवा-प्रतिरोधी श्वसन संक्रमणों पर केंद्रित रहा है। उनके शोध का उपयोग क्लिनिकल उपचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में किया जा रहा है। उन्होंने श्वसन रोगों के निदान और उपचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान दिया है।
दक्षिण अफ्रीका और वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान
दक्षिण अफ्रीका लंबे समय से एचआईवी और टीबी जैसी बीमारियों से प्रभावित देशों में शामिल रहा है। ऐसे में सार्वजनिक स्वास्थ्य वैज्ञानिकों की भूमिका वहां अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रोफेसर करीम और प्रोफेसर धेड़ा जैसे वैज्ञानिकों ने न केवल दक्षिण अफ्रीका बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली को भी मजबूत बनाने में योगदान दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार इन दोनों वैज्ञानिकों को मिला सम्मान विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधान में भारतीय मूल के विशेषज्ञों की वैश्विक पहचान को दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ऑर्डर ऑफ मापुंगुब्वे दक्षिण अफ्रीका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय सम्मान राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
- कैप्रिसा का पूरा नाम सेंटर फॉर द एड्स प्रोग्राम ऑफ रिसर्च इन साउथ अफ्रीका है।
- मापुंगुब्वे दक्षिणी अफ्रीका का एक प्राचीन साम्राज्य था और यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल से जुड़ा है।
प्रोफेसर सलीम अब्दूल करीम और प्रोफेसर कीर्तन धेड़ा को मिला यह सम्मान वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान की अंतरराष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है। इससे भारतीय मूल के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को भी नई पहचान मिली है।