भारतीय सेना 300 से अधिक के-9 वज्र हॉवित्जर खरीदने की तैयारी में
भारतीय सेना अपनी तोपखाना क्षमता को और मजबूत करने के लिए जून 2026 में 300 से अधिक अतिरिक्त के-9 वज्र स्वचालित हॉवित्जर तोपों की खरीद का प्रस्ताव तैयार कर रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। प्रस्ताव को जल्द ही रक्षा खरीद प्रक्रिया की महत्वपूर्ण संस्था रक्षा खरीद बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह हाल के दशकों में भारतीय सेना की सबसे बड़ी तोपखाना खरीद परियोजनाओं में से एक होगी।
के-9 वज्र-टी की प्रमुख विशेषताएं
के-9 वज्र-टी एक 155 मिमी/52-कैलिबर ट्रैक्ड स्वचालित हॉवित्जर है, जिसे भारत में Larsen & Toubro द्वारा निर्मित किया जाता है। इसका निर्माण दक्षिण कोरिया की Hanwha Aerospace से प्राप्त प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के तहत किया जा रहा है। यह अत्याधुनिक तोप 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम है। इसकी ट्रैक्ड गतिशीलता इसे विभिन्न प्रकार के भूभागों में तेजी से तैनात होने और संचालन करने की क्षमता प्रदान करती है।
खरीद प्रक्रिया का इतिहास
भारतीय सेना ने वर्ष 2017 में 100 के-9 वज्र तोपों की पहली खरीद के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था। इस अनुबंध के तहत सभी तोपों की आपूर्ति वर्ष 2021 तक पूरी कर दी गई थी। इसके बाद दिसंबर 2023 में रक्षा मंत्रालय ने अतिरिक्त 100 के-9 वज्र तोपों की खरीद के लिए लगभग 7,600 करोड़ रुपये का दूसरा अनुबंध किया। अब प्रस्तावित तीसरा ऑर्डर भारतीय सेना की दीर्घकालिक आधुनिकीकरण रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
सामरिक महत्व और तैनाती
के-9 वज्र प्रणाली का उपयोग मुख्य रूप से पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर लंबी दूरी की तोपखाना सहायता प्रदान करने के लिए किया जाता है। इस प्रणाली का परीक्षण Ladakh के अत्यधिक ऊंचाई वाले और ठंडे क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक किया गया है। विशेष रूप से Line of Actual Control के निकट क्षेत्रों में इसकी तैनाती भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करती है। कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण भूभाग में इसकी कार्यक्षमता ने इसे सेना के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार प्रणाली बना दिया है।
भारतीय रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
यदि नया प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है, तो लार्सन एंड टुब्रो द्वारा निर्मित के-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। इससे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलेगा और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी। यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता और विदेशी प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है। इसके माध्यम से देश में रोजगार, औद्योगिक विकास और रक्षा उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- के-9 वज्र-टी दक्षिण कोरिया के के-9 थंडर प्लेटफॉर्म पर आधारित है।
- स्वचालित हॉवित्जर तोपें उच्च गतिशीलता और लंबी दूरी की मारक क्षमता का संयोजन प्रदान करती हैं।
- रक्षा खरीद बोर्ड भारत की रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्था है।
- वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) भारत और चीन के बीच कई क्षेत्रों में वास्तविक सीमा के रूप में कार्य करती है।
भारतीय सेना द्वारा के-9 वज्र हॉवित्जर की प्रस्तावित खरीद देश की तोपखाना शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए ऐसी प्रणालियां सेना को तेज, सटीक और प्रभावी अग्नि समर्थन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह पहल भारत की रक्षा तैयारियों और स्वदेशी रक्षा उत्पादन दोनों को मजबूत करने में सहायक साबित हो सकती है।