उत्तर प्रदेश के सीतापुर में 250 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना को रक्षा मंत्रालय की मंजूरी
रक्षा मंत्रालय ने 9 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर स्थित पूर्व छावनी क्षेत्र (एक्स-कैंटोनमेंट एरिया) में 250 मेगावाट क्षमता वाली सौर ऊर्जा परियोजना को मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना के साथ बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) भी स्थापित की जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनाया जा सकेगा। परियोजना के लिए लगभग 850 एकड़ खाली रक्षा भूमि का उपयोग किया जाएगा और इसका कार्यान्वयन NTPC Limited द्वारा किया जाएगा।
रक्षा भूमि पर सौर ऊर्जा परियोजना
सौर ऊर्जा परियोजनाएं सूर्य के प्रकाश को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए फोटोवोल्टिक पैनलों या सौर तापीय तकनीकों का उपयोग करती हैं। सीतापुर में प्रस्तावित यह परियोजना रक्षा मंत्रालय के स्वामित्व वाली खाली भूमि पर विकसित की जाएगी। रक्षा भूमि वह भूमि होती है जो सैन्य, प्रशासनिक या अन्य रक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिए रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में होती है। वहीं पूर्व छावनी क्षेत्र ऐसे इलाके होते हैं जिन्हें पहले कैंटोनमेंट के रूप में अधिसूचित किया गया था, लेकिन बाद में स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत पुनर्वर्गीकृत कर दिया गया।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का महत्व
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage System – BESS) इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। यह प्रणाली अतिरिक्त उत्पादित बिजली को संग्रहीत कर बाद में उपयोग के लिए सुरक्षित रखती है। सौर ऊर्जा उत्पादन दिन के समय और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में बीईएसएस कम उत्पादन या अधिक मांग के समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद करता है। यह तकनीक विद्युत ग्रिड के संतुलन, बैकअप आपूर्ति और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
परियोजना के क्रियान्वयन में विभिन्न संस्थाओं की भूमिका
इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए रक्षा मंत्रालय, एनटीपीसी लिमिटेड, रक्षा मंत्रालय का एकीकृत मुख्यालय (सेना) तथा रक्षा संपदा महानिदेशालय के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। एनटीपीसी भारत की अग्रणी विद्युत उत्पादन कंपनियों में से एक है और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी तेजी से अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। परियोजना के विकास और संचालन के लिए प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसके तहत तकनीकी और वित्तीय मानकों के आधार पर उपयुक्त डेवलपर का चयन किया जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की दिशा में कदम
रक्षा प्रतिष्ठानों को संचालन, आवासीय सुविधाओं और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है। ऐसे में रक्षा भूमि पर विकसित होने वाली सौर ऊर्जा परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पारंपरिक विद्युत स्रोतों पर निर्भरता भी कम कर सकती हैं। सीतापुर की यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में सौर, पवन, जलविद्युत और जैव ऊर्जा प्रमुख स्रोत हैं।
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली नवीकरणीय ऊर्जा को विद्युत ग्रिड में प्रभावी ढंग से एकीकृत करने की महत्वपूर्ण तकनीक है।
- NTPC Limited की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी और यह भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनियों में शामिल है।
- भारत में छावनी क्षेत्रों का प्रशासन Cantonments Act, 2006 के तहत संचालित किया जाता है।
सीतापुर में प्रस्तावित 250 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना भारत की हरित ऊर्जा नीति और रक्षा क्षेत्र की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि भविष्य में रक्षा भूमि के बेहतर उपयोग और टिकाऊ विकास के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकती है।