ब्रुकफील्ड की 600 मिलियन डॉलर की पहल से भारत में हरित ऊर्जा निवेश को रफ्तार
ब्रुकफील्ड ने 30 जुलाई 2026 को भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ‘लुमारा’ नाम से एक नया प्लेटफॉर्म शुरू किया है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए करीब 600 मिलियन डॉलर का निवेश सौर, पवन और बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं में किया जाएगा। शुरुआत में इसके पास 6 गीगावॉट से अधिक क्षमता वाला पोर्टफोलियो होगा, जिससे भारत के ऊर्जा ढांचे में बड़े पैमाने पर हरित परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
लुमारा का निवेश मॉडल और फोकस
लुमारा को ब्रुकफील्ड के Catalytic Transition Fund से वित्तपोषित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल नई परियोजनाओं में पूंजी लगाना नहीं, बल्कि उत्पादन और भंडारण दोनों क्षेत्रों में विकास को समर्थन देना है। सौर, पवन और बैटरी स्टोरेज पर इसका फोकस इसलिए अहम है क्योंकि भारत की ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है और ग्रिड को स्थिर रखने के लिए भंडारण क्षमता की जरूरत भी बढ़ रही है।यह प्लेटफॉर्म उन व्यावहारिक चुनौतियों को भी ध्यान में रखता है जो अक्सर परियोजनाओं की रफ्तार धीमी करती हैं, जैसे बिजली खरीद समझौते की बातचीत में देरी, ग्रिड कनेक्शन की कतारें और भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय।
भारत में ब्रुकफील्ड की मौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण है
ब्रुकफील्ड पहले से ही भारत में ऊर्जा क्षेत्र का बड़ा निवेशक है। कंपनी के पास देश में लगभग 45 गीगावॉट की पवन और सौर संपत्तियां परिचालन में या विकासाधीन हैं। इसके अलावा, 30 जुलाई 2026 तक भारत में ब्रुकफील्ड का कुल निवेश 32 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जो यह दिखाता है कि कंपनी भारत को दीर्घकालिक निवेश गंतव्य मानती है।भारत जैसे बाजार में बड़े निवेशकों की भूमिका इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां उपयोगिता-स्तरीय सौर, पवन और स्टोरेज परियोजनाओं के लिए पूंजी, तकनीक और निष्पादन क्षमता तीनों की जरूरत होती है।
ऊर्जा संक्रमण और बाजार के लिए संकेत
लुमारा जैसे प्लेटफॉर्म भारत के ऊर्जा संक्रमण को नई दिशा दे सकते हैं। सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में उतार-चढ़ाव रहता है, इसलिए बैटरी स्टोरेज बिजली आपूर्ति को संतुलित करने में मदद करती है। साथ ही, कॉरपोरेट उपभोक्ता, हाइपरस्केलर और सरकारी खरीदारों की बढ़ती मांग से स्वच्छ बिजली बाजार का दायरा और व्यापक हो रहा है।ब्रुकफील्ड की यह पहल बताती है कि वैश्विक निवेशक अब सिर्फ उत्पादन क्षमता नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन—उत्पादन, भंडारण और ग्रिड-तैयारी—पर ध्यान दे रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PPA यानी पावर परचेज एग्रीमेंट बिजली बेचने वाले और खरीदने वाले के बीच होने वाला अनुबंध होता है।
- बैटरी स्टोरेज का उपयोग अतिरिक्त बिजली को बाद में इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रखने में किया जाता है।
- भारत में सौर, पवन और स्टोरेज परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के प्रमुख हिस्से हैं।
- ग्रिड कनेक्शन, भूमि अधिग्रहण और PPA निष्पादन परियोजना विकास के सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण चरण हैं।
कुल मिलाकर, ब्रुकफील्ड का लुमारा प्लेटफॉर्म भारत में हरित ऊर्जा निवेश की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह पहल न केवल नई क्षमता जोड़ेगी, बल्कि ऊर्जा भंडारण और परियोजना निष्पादन की चुनौतियों को भी संबोधित करने की कोशिश करेगी।