बेल्जियम का कृत्रिम ऊर्जा द्वीप समुद्री बिजली ढांचे में नया प्रयोग
बेल्जियम के उत्तरी सागर में बन रहा प्रिंसेस एलिज़ाबेथ आइलैंड दुनिया के पहले कृत्रिम ऊर्जा द्वीप के रूप में चर्चा में है। यह परियोजना बेल्जियम तट से लगभग 45 किलोमीटर दूर विकसित की जा रही है और इसका उद्देश्य अपतटीय पवन ऊर्जा को राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए एक आधुनिक समुद्री हब तैयार करना है।
ऊर्जा ग्रिड के लिए समुद्र में नया केंद्र
यह द्वीप लगभग 5 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला एक बहुउद्देशीय ऊर्जा केंद्र होगा। इसे बेल्जियम की बिजली व्यवस्था में अपतटीय पवन ऊर्जा के एकीकरण के लिए डिजाइन किया गया है। इस परियोजना से जुड़ी प्रमुख संस्था एलिया ट्रांसमिशन बेल्जियम है, जो देश की ट्रांसमिशन सिस्टम ऑपरेटर है।
द्वीप पर उच्च-वोल्टेज सबस्टेशन और ग्रिड कनेक्शन से जुड़ा ढांचा तैयार किया जा रहा है। दूसरे चरण में एसी कनेक्शन और संबंधित अवसंरचना पर काम होगा, ताकि समुद्र में उत्पादित बिजली को तटवर्ती नेटवर्क तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
कैसे बन रहा है यह कृत्रिम द्वीप
इस परियोजना की सबसे खास बात इसके निर्माण में इस्तेमाल हो रहे 23 कंक्रीट कैसॉन हैं। कैसॉन बड़े, जलरोधी कंक्रीट ढांचे होते हैं, जिनका उपयोग समुद्री निर्माण, बंदरगाह कार्यों और अपतटीय नींवों में किया जाता है। Jan De Nul Group और DEME Group ने इन कैसॉनों को नीदरलैंड के फ्लिसिंगेन बंदरगाह पर तैयार किया और बाद में उन्हें उत्तरी सागर में स्थापित किया गया।
जून 2026 तक 23 में से 17 कैसॉन समुद्र में लगाए जा चुके थे, जबकि 24 अगस्त 2026 तक सभी कैसॉन स्थापित कर दिए गए। इसके बाद परियोजना में रेत भरने और द्वीप के आकार को अंतिम रूप देने का चरण शुरू हुआ।
पर्यावरण के साथ तालमेल की कोशिश
इस परियोजना में केवल इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी का भी ध्यान रखा गया है। “रीफकवरी” नामक पहल के तहत द्वीप के आसपास चट्टानों में युवा सीपियों को शामिल किया गया है, ताकि कृत्रिम रीफ जैसा वातावरण बने और कटाव कम हो।
ऐसी प्रकृति-संवेदनशील समुद्री इंजीनियरिंग का उद्देश्य यह दिखाना है कि बड़े ऊर्जा ढांचे बनाते समय समुद्री जीवन के लिए भी अनुकूल परिस्थितियां तैयार की जा सकती हैं। यह मॉडल भविष्य में अन्य तटीय परियोजनाओं के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
लागत, वित्तपोषण और महत्व
एलिया ट्रांसमिशन बेल्जियम ने 7 सितंबर 2026 को यूरोपीय निवेश बैंक के साथ 1 अरब यूरो की ग्रीन क्रेडिट सुविधा पर हस्ताक्षर किए। परियोजना के दूसरे चरण में संशोधित डिजाइन के जरिए डायरेक्ट-करंट ढांचे की लागत में 2 अरब यूरो की कमी लाने की योजना है।
पूरी परियोजना की लागत 7 अरब यूरो से अधिक से लेकर 9 अरब यूरो से ऊपर तक आंकी गई है, जबकि पहले चरण की लागत लगभग 3.6 अरब यूरो बताई गई है। यह परियोजना 2031 तक चालू होने की उम्मीद है और इससे 3.15 गीगावाट तक अपतटीय पवन ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ा जा सकेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रिंसेस एलिज़ाबेथ आइलैंड को दुनिया का पहला कृत्रिम ऊर्जा द्वीप माना जा रहा है।
- यह बेल्जियम के तट से लगभग 45 किलोमीटर दूर उत्तरी सागर में स्थित है।
- कैसॉन बड़े जलरोधी कंक्रीट ढांचे होते हैं, जिनका उपयोग समुद्री निर्माण में किया जाता है।
- यह परियोजना 3.15 गीगावाट तक अपतटीय पवन ऊर्जा को बेल्जियम ग्रिड से जोड़ने के लिए बनाई जा रही है।
समुद्री इंजीनियरिंग, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रिड अवसंरचना का यह संयोजन यूरोप में ऊर्जा संक्रमण की दिशा को दर्शाता है। प्रिंसेस एलिज़ाबेथ आइलैंड आने वाले वर्षों में अपतटीय पवन ऊर्जा के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।