प्रोजेक्ट जोरावर में टाटा की बढ़त, भारतीय सेना को मिलेगा हल्का स्वदेशी टैंक

प्रोजेक्ट जोरावर में टाटा की बढ़त, भारतीय सेना को मिलेगा हल्का स्वदेशी टैंक

रक्षा क्षेत्र की बड़ी खरीद प्रक्रिया में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने प्रोजेक्ट जोरावर के तहत 25 टन वर्ग के लाइट टैंक विकास कार्यक्रम में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी यानी L1 का स्थान हासिल किया है। यह परियोजना करीब 20,000 करोड़ रुपये की है और इसका उद्देश्य भारतीय सेना के लिए ऐसा हल्का युद्धक टैंक तैयार करना है, जो ऊंचाई वाले और दुर्गम इलाकों में बेहतर ढंग से काम कर सके।

प्रोजेक्ट जोरावर क्यों अहम है

प्रोजेक्ट जोरावर, Armoured Fighting Vehicle-Indian Light Tank (AFV-ILT) कार्यक्रम से जुड़ा है। इसका फोकस ऐसे टैंक पर है जो लद्दाख जैसे क्षेत्रों में तैनाती के लिए उपयुक्त हो, जहां कम ऑक्सीजन, कठिन भू-भाग और सीमित सड़क नेटवर्क भारी बख्तरबंद वाहनों की गति और संचालन क्षमता को प्रभावित करते हैं। भारतीय सेना के मौजूदा मुख्य युद्धक टैंक, जैसे T-72 और T-90, अपेक्षाकृत भारी प्लेटफॉर्म हैं, जबकि यह नया लाइट टैंक ऊंचाई वाले मोर्चों के लिए अधिक अनुकूल माना जा रहा है।

Make-I श्रेणी में स्वदेशी विकास पर जोर

इस खरीद को रक्षा मंत्रालय की Make-I श्रेणी के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। यह श्रेणी देश में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन और विकास को प्रोत्साहित करती है और चयनित परियोजनाओं में प्रोटोटाइप विकास लागत का 70% तक सरकारी वित्तपोषण उपलब्ध करा सकती है। TASL को 130 सप्ताह के भीतर दो परिचालन लाइट टैंक प्रोटोटाइप विकसित कर उन्हें प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है।

बोली प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा

इस परियोजना के लिए तकनीकी और वाणिज्यिक बोलियों का मूल्यांकन लगभग तीन वर्षों तक चला। कुल पांच कॉर्पोरेट इकाइयों ने इसमें भाग लिया। महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी यानी L2 रही और उसे भी प्रोटोटाइप विकास का काम सौंपा गया है। उत्पादन आदेश को लेकर पहले कुछ आपत्तियां उठी थीं, लेकिन बाद में भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय ने उन्हें खारिज कर दिया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • L1 का अर्थ सरकारी निविदा में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी होता है, जबकि L2 दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को कहा जाता है।
  • प्रोजेक्ट जोरावर का नाम 19वीं सदी के डोगरा सेनापति जनरल जोरावर सिंह कहलोन के नाम पर रखा गया है।
  • लाइट टैंक का उपयोग खास तौर पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किया जाता है, जहां भारी टैंकों की गतिशीलता सीमित हो सकती है।
  • प्रोटोटाइप विकास का उद्देश्य किसी रक्षा प्लेटफॉर्म की डिजाइन, गतिशीलता और परिचालन उपयुक्तता की जांच करना होता है।

यह परियोजना भारत की रक्षा उत्पादन नीति में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका और स्वदेशी सैन्य तकनीक पर बढ़ते भरोसे को भी दिखाती है। यदि यह कार्यक्रम तय समय पर आगे बढ़ता है, तो भारतीय सेना को ऊंचाई वाले मोर्चों के लिए एक महत्वपूर्ण नई क्षमता मिल सकती है।

Originally written on September 9, 2026 and last modified on September 9, 2026.

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