अकासा एयर की पहली SAF उड़ान से हरित विमानन को नई दिशा
अकासा एयर ने 8 सितंबर 2026 को पारंपरिक विमानन ईंधन में 1% सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) मिलाकर अपनी पहली वाणिज्यिक उड़ान संचालित की। यह उड़ान मुंबई से गोवा के बीच चली और इसमें SAF की आपूर्ति भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने की। यह कदम भारतीय विमानन क्षेत्र में कम-कार्बन ईंधन के व्यावहारिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण परीक्षण माना जा रहा है।
SAF क्या है और यह क्यों अहम है
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल ऐसा विमानन ईंधन है जो जीवाश्म स्रोतों के बजाय इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल, कृषि अवशेष, नगर-ठोस कचरे और अन्य नवीकरणीय कच्चे माल से तैयार किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे मौजूदा जेट विमानों और हवाई अड्डों की ईंधन प्रणालियों में सीमित अनुपात में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी कारण इसे ड्रॉप-इन फ्यूल भी कहा जाता है।
विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए SAF को एक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि यह पारंपरिक एविएशन टर्बाइन फ्यूल के साथ ब्लेंड होकर काम कर सकता है। हालांकि, इसका उपयोग प्रमाणन, उपलब्धता और ब्लेंडिंग सीमाओं के दायरे में ही किया जाता है।
मुंबई-गोवा उड़ान का परिचालन महत्व
यह उड़ान 8 सितंबर 2026 को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दोपहर 1:05 बजे रवाना हुई और गोवा के मनोहर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 2:30 बजे पहुंची। 1% SAF ब्लेंड का उपयोग किसी प्रयोगशाला परीक्षण की बजाय वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में किया गया, ताकि ईंधन हैंडलिंग, रिफ्यूलिंग और उड़ान प्रदर्शन से जुड़े पहलुओं को परखा जा सके।
ऐसी वाणिज्यिक डेमो उड़ानें इसलिए महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि वे यह दिखाती हैं कि हरित ईंधन को मौजूदा विमानन ढांचे में किस तरह सुरक्षित और व्यावहारिक रूप से शामिल किया जा सकता है। यह भारत में भविष्य की SAF-आधारित उड़ानों के लिए एक संदर्भ बिंदु भी बनती है।
भारत में SAF ढांचे की दिशा
BPCL और अकासा एयर ने 14 जुलाई 2026 को SAF की आपूर्ति और ऑफटेक के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इस व्यवस्था का उद्देश्य देश में SAF आपूर्ति-श्रृंखला, ईंधन उपलब्धता और भविष्य के व्यावसायिक उपयोग के लिए एक ढांचा तैयार करना है।
अकासा एयर के मुख्य वित्तीय अधिकारी अंकुर गोयल के अनुसार, भारत में SAF को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए घरेलू आपूर्ति-श्रृंखला, पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन और व्यावसायिक व्यवहार्यता जरूरी है। वहीं BPCL के मार्केटिंग निदेशक शुभंकर सेन ने बताया कि भारत में फीडस्टॉक एकत्रीकरण अब भी खंडित आपूर्ति-श्रृंखला की चुनौती से जूझता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- SAF को पारंपरिक जेट ईंधन के साथ मिलाकर मौजूदा विमानों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- भारत ने 2030 तक वाणिज्यिक विमानन में 5% SAF ब्लेंडिंग का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा है।
- BPCL भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों में से एक है और विमानन ईंधन आपूर्ति में भी भूमिका निभाती है।
- मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा महाराष्ट्र में और मनोहर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा गोवा में स्थित है।
यह उड़ान भारत में हरित विमानन की दिशा में एक छोटा लेकिन ठोस कदम है। यदि आपूर्ति-श्रृंखला और लागत से जुड़ी चुनौतियाँ कम होती हैं, तो SAF भविष्य में देश के विमानन क्षेत्र के लिए एक अहम विकल्प बन सकता है।