भारत को मिला नया महासागरीय अनुसंधान पोत, गहरे समुद्र की खोज को मिलेगी रफ्तार

भारत को मिला नया महासागरीय अनुसंधान पोत, गहरे समुद्र की खोज को मिलेगी रफ्तार

भारत ने समुद्री विज्ञान और गहरे समुद्र की खोज के लिए एक नया और उन्नत अनुसंधान पोत ORV सागर मंथन (यार्ड 3041) लॉन्च किया है। 09 सितंबर 2026 को कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में यह पोत जलावतरण के लिए तैयार किया गया। इसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र के लिए डिजाइन, इंजीनियर और निर्मित किया है।

गहरे समुद्र की खोज के लिए विशेष मंच

ORV सागर मंथन एक सामान्य जहाज नहीं, बल्कि समुद्री वैज्ञानिक सर्वेक्षणों, महासागरीय अवलोकनों और गहरे समुद्र में संचालन के लिए बनाया गया विशेष पोत है। इसकी लंबाई 89.5 मीटर है और इसे ऐसे वातावरण में काम करने के लिए तैयार किया गया है, जहां समुद्री परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण होती हैं, खासकर दक्षिणी महासागर जैसे क्षेत्रों में।

इस पोत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह समुद्र के भीतर खनिज खोज, उप-समुद्री तेल और गैस से जुड़े भूकंपीय सर्वेक्षण, समुद्र तल से नमूने लेने और स्वायत्त तथा रिमोट से संचालित अंडरवॉटर वाहनों की तैनाती जैसे कार्य कर सकेगा। इससे भारत की समुद्री अनुसंधान क्षमता और संसाधन आकलन की तैयारी दोनों मजबूत होंगी।

डीप ओशन मिशन से जुड़ी अहम कड़ी

यह पोत भारत सरकार के डीप ओशन मिशन के तहत वर्टिकल-4, यानी डीप ओशन सर्वे एंड एक्सप्लोरेशन के अंतर्गत बनाया गया है। इस परियोजना की लागत लगभग 840 करोड़ रुपये बताई गई है और पोत की अनुमानित सेवा अवधि 30 वर्ष है। यह पहल भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत समुद्र के भीतर मौजूद संसाधनों, भूगर्भीय संरचनाओं और जैविक विविधता का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है।

ORV सागर मंथन, भारत के पुराने बहुउद्देशीय महासागरीय अनुसंधान पोत ORV सागर कन्या की जगह लेगा। ORV सागर कन्या को 1983 में जर्मनी से खरीदा गया था और उसने 43 वर्षों तक सेवा दी। नए पोत के आने से भारत को आधुनिक उपकरणों, बेहतर संचालन क्षमता और अधिक गहराई तक वैज्ञानिक पहुंच का लाभ मिलेगा।

समुद्री अनुसंधान में आत्मनिर्भरता की दिशा

यह लॉन्च भारत के समुद्री अनुसंधान ढांचे में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देश के पास ऐसा प्लेटफॉर्म होगा, जो केवल सर्वेक्षण ही नहीं बल्कि समुद्र के भीतर जटिल वैज्ञानिक अभियानों को भी समर्थन दे सकेगा। इससे समुद्री संसाधनों के आकलन, पर्यावरणीय अध्ययन और भविष्य की ऊर्जा संभावनाओं पर काम आसान होगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ORV सागर मंथन एक Ocean Research Vessel है, यानी समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए विशेष पोत।
  • इसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने बनाया है, जो कोलकाता स्थित एक सार्वजनिक क्षेत्र की शिपबिल्डिंग कंपनी है।
  • राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • डीप ओशन मिशन भारत सरकार की समुद्री खोज और संसाधन अध्ययन से जुड़ी प्रमुख पहल है।

ORV सागर मंथन के साथ भारत ने समुद्री विज्ञान, गहरे समुद्र की खोज और संसाधन अध्ययन के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता को एक नई दिशा दी है। यह पोत आने वाले वर्षों में देश की महासागरीय अनुसंधान जरूरतों का अहम आधार बनेगा।

Originally written on September 9, 2026 and last modified on September 9, 2026.

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