प्रशांत टाइफून और एल नीनो से भारतीय मानसून पर बढ़ा दबाव
प्रशांत महासागर में बनने वाले शक्तिशाली टाइफून और भूमध्यरेखीय प्रशांत के गर्म होने का असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर भी पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इन घटनाओं से वायुमंडलीय परिसंचरण, वर्षा के वितरण और बंगाल की खाड़ी तथा उत्तर हिंद महासागर में चक्रवाती गतिविधि प्रभावित होती है। अगस्त 2026 में जापान के पास सुपर टाइफून डॉल्फिन पर नजर रखी जा रही थी, जबकि भारत में मानसूनी बारिश पर इसके परोक्ष प्रभाव का आकलन किया जा रहा था।
प्रशांत और भारतीय मानसून का संबंध
पश्चिमी प्रशांत में बनने वाले टाइफून भारतीय मानसून की धारा को कई तरह से प्रभावित कर सकते हैं। ये मानसून ट्रफ की स्थिति बदल सकते हैं, बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मौसम तंत्रों को कमजोर कर सकते हैं और भारतीय उपमहाद्वीप तक नमी के प्रवाह को घटा सकते हैं। जुलाई 2026 में पश्चिमी प्रशांत के एक मजबूत मौसम तंत्र के साथ दक्षिण-पश्चिम मानसून का कमजोर चरण जुड़ा था, जिसके कारण मध्य, पश्चिमी और प्रायद्वीपीय भारत में बारिश अपेक्षाकृत कम रही।
एल नीनो क्यों अहम है
एल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह के तापमान के असामान्य रूप से बढ़ने की स्थिति है। यह ENSO यानी एल नीनो-दक्षिणी दोलन चक्र का एक चरण है। 2026 में विकसित हो रहे एल नीनो को केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के 4 जून को, यानी सामान्य तिथि से तीन दिन देर से पहुंचने से जोड़ा गया। इसी दौरान भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मानसूनी वर्षा को दीर्घकालिक औसत के 90% रहने का अनुमान जताया था।
हिंद-प्रशांत चक्रवात क्षेत्र पर नजर
उत्तर-पश्चिम प्रशांत, दक्षिण चीन सागर और उत्तर हिंद महासागर मिलकर हिंद-प्रशांत उष्णकटिबंधीय चक्रवात क्षेत्र का हिस्सा बनाते हैं। 2026 के टाइफून मौसम में तीव्र और लंबे समय तक बने रहने वाले टाइफून का जोखिम अधिक रहने का अनुमान था। इस मौसम के लिए Accumulated Cyclone Energy यानी ACE को 1991-2020 के सामान्य स्तर से लगभग 1.4 गुना आंका गया। ACE किसी मौसम में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की कुल ऊर्जा मापने का मानक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के असामान्य गर्म होने की स्थिति है और यह ENSO चक्र का गर्म चरण माना जाता है।
- ला नीना ENSO का ठंडा चरण है और भारत में कई बार बेहतर मानसूनी परिस्थितियों से जुड़ी मानी जाती है।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग वर्षा की तुलना के लिए दीर्घकालिक औसत का उपयोग करता है।
- उत्तर हिंद महासागर चक्रवात मौसम में मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवात शामिल होते हैं।
इस तरह प्रशांत महासागर की मौसमी हलचलें भारत के मानसून को सीधे नहीं, बल्कि बड़े वायुमंडलीय और समुद्री तंत्रों के जरिए प्रभावित करती हैं। इसलिए प्रशांत टाइफून, एल नीनो और हिंद महासागर के चक्रवातों पर एक साथ नजर रखना मौसम पूर्वानुमान के लिए बेहद जरूरी हो जाता है।