लद्दाख में हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी से इको-टूरिज्म को नई पहचान

लद्दाख में हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी से इको-टूरिज्म को नई पहचान

लद्दाख ने भारत की पहली गाइडेड हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह पहल हिमालयी पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण और नियंत्रित पर्यटन को एक साथ जोड़ने वाली मानी जा रही है। इस सफारी के तहत हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग, काराकोरम वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नुब्रा, जांस्कर, शाम, कारगिल और द्रास जैसे क्षेत्रों में स्नो लेपर्ड और पक्षी-दर्शन के लिए विशेष ट्रेल विकसित किए जाएंगे।

सफारी का ढांचा और संचालन

इस योजना में विशेष रूप से डिजाइन किए गए ओपन-बैक जीप वाहनों का उपयोग किया जाएगा। इन वाहनों की कार्यप्रणाली काजीरंगा नेशनल पार्क और रणथंभौर नेशनल पार्क में चलने वाली सफारी व्यवस्थाओं से प्रेरित बताई गई है। पर्यटन को सुरक्षित और नियंत्रित रखने के लिए केवल प्रशिक्षित स्थानीय ड्राइवर और गाइड ही इन दौरों का संचालन करेंगे। इससे स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ वन्यजीवों पर अनावश्यक दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

संरक्षण और स्थानीय भागीदारी पर जोर

यह निर्णय स्नो लेपर्ड और हाई-एल्टीट्यूड नेचर कंजर्वेशन सोसाइटी, यानी SHAN Conservation Society, की पहली गवर्निंग बॉडी बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने की। प्रशासन ने पक्षी-दर्शन और वन्यजीव व्याख्या के लिए 20 स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। इसके अलावा प्रमुख पारिस्थितिक स्थलों पर 10 बर्ड-वॉचिंग हाइड्स भी बनाए जाएंगे, ताकि पर्यटक बिना व्यवधान के जीव-जंतुओं का अवलोकन कर सकें।

लद्दाख की जैव-विविधता और महत्व

लद्दाख को भारत के सबसे समृद्ध उच्च-ऊंचाई वाले जैव-विविधता क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां लगभग 1,800 वैस्कुलर पौधों की प्रजातियां, 340 पक्षी प्रजातियां और 38 से अधिक स्तनधारी प्रजातियां पाई जाती हैं। सबसे अहम बात यह है कि भारत में अनुमानित 718 स्नो लेपर्ड में से 477 लद्दाख में दर्ज किए गए हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र स्नो लेपर्ड संरक्षण के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • हेमिस नेशनल पार्क भारत में स्नो लेपर्ड के प्रमुख आवास क्षेत्रों में से एक है।
  • चांगथांग और काराकोरम लद्दाख के महत्वपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाले वन्यजीव क्षेत्र हैं।
  • ओपन-बैक जीप सफारी का उपयोग कई संरक्षित क्षेत्रों में नियंत्रित वन्यजीव दर्शन के लिए किया जाता है।
  • स्नो लेपर्ड हिमालयी उच्च-ऊंचाई पारिस्थितिकी तंत्र की एक संवेदनशील और संरक्षित बड़ी बिल्ली प्रजाति है।

कब शुरू होगी सफारी

अधिकारियों के अनुसार यह सफारी सर्दियों में शुरू करने की योजना है, क्योंकि यही समय स्नो लेपर्ड के दिखने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। प्रशासन को लॉन्च से पहले सभी लॉजिस्टिक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि यह योजना सफल रहती है, तो लद्दाख देश में इको-टूरिज्म और संरक्षण-आधारित पर्यटन का एक नया मॉडल पेश कर सकता है।

Originally written on August 7, 2026 and last modified on August 7, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *