प्रथम विश्व युद्ध के 9,909 भारतीय सैनिकों को मिली आधिकारिक पहचान

प्रथम विश्व युद्ध के 9,909 भारतीय सैनिकों को मिली आधिकारिक पहचान

प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश भारतीय सेना के हजारों सैनिकों के योगदान को लंबे समय बाद आधिकारिक मान्यता मिली है। 6 जुलाई 2026 को कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन (सीडब्ल्यूजीसी) ने 9,909 ऐसे भारतीय सैनिकों के नाम अपने अभिलेखों में शामिल किए, जिन्हें पहले आधिकारिक रूप से स्मरण नहीं किया गया था। यह पिछले 80 वर्षों से अधिक समय में सीडब्ल्यूजीसी के शहीदों के डेटाबेस में किया गया सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है। इस निर्णय से उन सैनिकों के बलिदान को ऐतिहासिक सम्मान मिला है, जिनका योगदान वर्षों तक आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रहा।

कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन की भूमिका

कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन एक अंतर-सरकारी संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष 1917 में ‘इम्पीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन’ के रूप में हुई थी। बाद में इसका नाम बदलकर वर्तमान स्वरूप दिया गया। यह संस्था राष्ट्रमंडल देशों के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की कब्रों, स्मारकों और स्मृति अभिलेखों का संरक्षण तथा रखरखाव करती है। इसका उद्देश्य युद्ध में बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखना है।

ब्रिटिश भारतीय सेना और अभिलेखों की खोज

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लगभग 14 लाख सैनिक ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। इनमें बड़ी संख्या अविभाजित पंजाब क्षेत्र से थी, जो उस समय सेना के लिए प्रमुख भर्ती केंद्र माना जाता था। यूनाइटेड किंगडम स्थित पंजाब हेरिटेज एसोसिएशन के स्वयंसेवकों ने लाहौर संग्रहालय में सुरक्षित हस्तलिखित गांवों के रजिस्टरों का डिजिटलीकरण और अध्ययन किया। इन अभिलेखों के माध्यम से सैनिकों के नाम, उनके गांव और पारिवारिक पहचान को प्रमाणित किया गया, जिसके आधार पर हजारों सैनिकों को आधिकारिक मान्यता मिल सकी।

क्यों छूट गए थे हजारों सैनिक?

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अनेक भारतीय सैनिक युद्धभूमि से दूर अस्पतालों या अन्य स्थानों पर चोटों के कारण मृत्यु को प्राप्त हुए थे। उस समय ब्रिटिश भारतीय सरकार की नीतियों के कारण ऐसे सैनिकों को आधिकारिक युद्ध स्मारकों और अभिलेखों में शामिल नहीं किया गया। बाद में कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन ने इन नीतियों की समीक्षा की और इन सैनिकों के नाम अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में जोड़ दिए। इससे उनके बलिदान को वह सम्मान मिला, जिसके वे लंबे समय से अधिकारी थे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन की स्थापना वर्ष 1917 में इम्पीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन के रूप में हुई थी।
  • प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक चला और इसमें लगभग 14 लाख सैनिक ब्रिटिश भारतीय सेना के माध्यम से शामिल हुए।
  • इराक स्थित बसरा स्मारक प्रथम विश्व युद्ध के मेसोपोटामिया अभियान में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है।
  • अप्रैल 2026 में कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन ने बसरा स्मारक से अनुपस्थित लगभग 33,000 भारतीय सैनिकों के नामों का डिजिटल रूप से स्मरण किया था।

9,909 भारतीय सैनिकों को आधिकारिक मान्यता मिलना केवल ऐतिहासिक रिकॉर्ड में सुधार नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों और समुदायों के लिए सम्मान का प्रतीक भी है, जिनके पूर्वजों ने प्रथम विश्व युद्ध में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। यह पहल इतिहास में छूटे हुए वीर सैनिकों को उनका उचित स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Originally written on July 6, 2026 and last modified on July 6, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *