प्याज महंगाई पर लगाम के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ की शुरुआत

प्याज महंगाई पर लगाम के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ की शुरुआत

प्याज की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुरू की। इस विशेष परिवहन व्यवस्था के तहत महाराष्ट्र के नासिक से प्याज को दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे बड़े उपभोग केंद्रों तक भेजा जाएगा। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब देश में प्याज की खुदरा कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं और घरेलू खाद्य मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ा है।

क्यों जरूरी पड़ी यह पहल

22 अगस्त 2026 को प्याज का राष्ट्रीय औसत खुदरा मूल्य ₹42 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 45% और पिछले महीने की तुलना में 19% अधिक था। दिल्ली में प्याज ₹65 प्रति किलोग्राम और चेन्नई में ₹58 प्रति किलोग्राम तक बिक रहा था। प्याज भारत में एक संवेदनशील कृषि-उत्पाद है, क्योंकि इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे आम परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित करता है।

महाराष्ट्र के लासलगांव, जो देश का सबसे बड़ा प्याज व्यापार केंद्र माना जाता है, वहां थोक भाव जून 2026 के ₹2,000 प्रति क्विंटल से बढ़कर ₹3,800 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। यह संकेत है कि आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन ने बाजार पर दबाव बनाया है।

बफर स्टॉक और सरकारी खरीद की भूमिका

उपभोक्ता मामले विभाग कीमतों में तेज उछाल के समय खुले बाजार में प्याज जारी करने के लिए बफर स्टॉक का उपयोग करता है। बफर स्टॉक वह सरकारी भंडार होता है, जिसे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को स्थिर रखने के लिए रखा जाता है।

वर्तमान वित्त वर्ष में NAFED और NCCF ने मिलकर लगभग 1.2 लाख टन प्याज की खरीद की है। सरकार ने खरीद गति बढ़ाने के लिए मई 2026 में न्यूनतम खरीद मूल्य को ₹1,270 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर ₹2,645 प्रति क्विंटल कर दिया था। इससे सरकारी भंडार जल्दी तैयार किया जा सके और जरूरत पड़ने पर बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके।

‘कांदा एक्सप्रेस’ कैसे काम करेगी

‘कांदा एक्सप्रेस’ एक bulk transportation model है, जिसके जरिए अधिशेष उत्पादन वाले क्षेत्रों से प्याज को कमी वाले बाजारों तक रेल मार्ग से भेजा जाता है। यह मॉडल पहले अक्टूबर 2024 में भी मौसमी मूल्य वृद्धि को संभालने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र में खरीफ प्याज उत्पादन में देरी से मानसून के कारण 5% से 7% की गिरावट आ सकती है। हालांकि कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के लिए प्याज उत्पादन 30.73 मिलियन टन रहने का अनुमान जताया है। ऐसे में परिवहन और भंडारण की दक्षता कीमतों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाएगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लासलगांव, नासिक जिला, भारत का सबसे प्रसिद्ध प्याज व्यापार केंद्रों में से एक है।
  • NAFED का पूरा नाम National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India है।
  • NCCF का पूरा नाम National Cooperative Consumers’ Federation of India है।
  • बफर स्टॉक का उपयोग सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए करती है।

प्याज जैसी संवेदनशील वस्तु के लिए उत्पादन, खरीद, भंडारण और परिवहन—चारों स्तरों पर समन्वय जरूरी होता है। ‘कांदा एक्सप्रेस’ इसी श्रृंखला को मजबूत करने की एक व्यावहारिक कोशिश है।

Originally written on August 24, 2026 and last modified on August 24, 2026.

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