पोकरण में भारतीय वायुसेना की ड्रोन-रोधी हेलीकॉप्टर कवायद पूरी
भारतीय वायुसेना ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में 1 से 2 अगस्त 2026 के बीच आयोजित अभ्यास ROTOR CLAP III का समापन किया। यह रोटरी-विंग अभ्यास काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स यानी ड्रोन और अन्य हवाई खतरों का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता पर केंद्रित था।
ड्रोन-रोधी युद्ध पर केंद्रित रहा अभ्यास
ROTOR CLAP III इस श्रृंखला का तीसरा संस्करण था, जिसे विशेष रूप से हेलीकॉप्टर आधारित काउंटर-ड्रोन संचालन के लिए तैयार किया गया था। अभ्यास के दौरान मिसाइलों और रॉकेटों से लाइव फायरिंग की गई, ताकि वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में वायुसेना की प्रतिक्रिया, सटीकता और समन्वय का परीक्षण किया जा सके।आज के सुरक्षा परिदृश्य में छोटे और तेज़ ड्रोन सैन्य ठिकानों, अग्रिम चौकियों और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए नई चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में हेलीकॉप्टरों की मदद से हवाई खतरे का त्वरित आकलन और जवाब देना आधुनिक युद्धक तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
कौन-कौन से हेलीकॉप्टर शामिल रहे
इस अभ्यास में वायुसेना के कई प्रकार के हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म शामिल हुए, जिनमें AH-64 Apache अटैक हेलीकॉप्टर, Mi-25/35 गनशिप, HAL Prachand लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, तथा Chinook, Mi-17 और Dhruv जैसे ट्रांसपोर्ट और यूटिलिटी हेलीकॉप्टर शामिल थे।इन प्लेटफॉर्म्स की भूमिका अलग-अलग है। Apache और Mi-25/35 जैसे हेलीकॉप्टर आक्रामक अभियानों और फायर सपोर्ट के लिए उपयोगी हैं, जबकि Chinook, Mi-17 और Dhruv जैसे हेलीकॉप्टर सैनिकों, उपकरणों और रसद की आवाजाही में मदद करते हैं। Prachand जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमता का संकेत देते हैं।
पोकरण की रणनीतिक अहमियत
पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में स्थित है और सैन्य अभ्यासों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। खुले और विस्तृत भूभाग के कारण यहां हथियारों, विमानन प्लेटफॉर्म और फायरिंग प्रक्रियाओं का परीक्षण अपेक्षाकृत प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।इस तरह के अभ्यास केवल हथियारों की क्षमता दिखाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनमें संचालन की प्रक्रिया, लक्ष्य पहचान, त्वरित निर्णय और विभिन्न इकाइयों के बीच तालमेल की भी जांच होती है। ROTOR CLAP III ने यह दिखाया कि हेलीकॉप्टर आधारित बल भविष्य के ड्रोन खतरों के खिलाफ बहु-स्तरीय प्रतिक्रिया के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित है।
- Counter-Unmanned Aerial Systems का उपयोग ड्रोन जैसे अनमैन्ड हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है।
- HAL Prachand भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने विकसित किया है।
- Chinook, Mi-17 और Dhruv जैसे हेलीकॉप्टर मुख्य रूप से ट्रांसपोर्ट और यूटिलिटी भूमिकाओं में उपयोग होते हैं।
ROTOR CLAP III जैसे अभ्यास यह संकेत देते हैं कि भारतीय वायुसेना पारंपरिक हेलीकॉप्टर क्षमताओं को नई तकनीकी चुनौतियों, खासकर ड्रोन-रोधी युद्ध, के अनुरूप ढाल रही है।