पुडुचेरी में राशन लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य

पुडुचेरी में राशन लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य

पुडुचेरी में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। 26 फरवरी 2026 से यह व्यवस्था केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी आधारित खाद्य सब्सिडी योजना के तहत लागू की गई है। इस नई प्रणाली में खाद्य सब्सिडी वितरण के लिए डिजिटल मुद्रा ई₹ का उपयोग किया जा रहा है, जिसने पहले लागू डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर-कैश मॉडल का स्थान लिया है।

केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी क्या है

केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी यानी सीबीडीसी किसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की जाने वाली डिजिटल मुद्रा होती है। भारत में इसे ई₹ नाम दिया गया है और इसका संचालन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किया जाता है। यह डिजिटल मुद्रा क्रिप्टोकरेंसी से अलग होती है क्योंकि इसे सरकार और केंद्रीय बैंक की वैधानिक मान्यता प्राप्त होती है। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

पुडुचेरी पायलट परियोजना की विशेषताएं

पुडुचेरी में सीबीडीसी आधारित खाद्य सब्सिडी वितरण परियोजना 26 फरवरी 2026 से शुरू की गई। इसके तहत लाभार्थियों को एक ई-वॉलेट प्रदान किया जाता है, जिसकी वैधता जारी होने की तारीख से तीन महीने तक रहती है। इस डिजिटल मुद्रा का उपयोग केवल उचित मूल्य दुकानों और अधिकृत विक्रेता केंद्रों से चावल तथा अन्य खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जा सकता है। योजना का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और नकद लेनदेन की समस्याओं को कम करना है।

ई-केवाईसी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली

जिन लाभार्थियों ने अभी तक ई-केवाईसी पूरा नहीं किया है, उन्हें आधार कार्ड और राशन कार्ड के साथ कॉमन सर्विस सेंटर पर जाना होगा। इन केंद्रों पर ई-केवाईसी प्रक्रिया निशुल्क पूरी की जा रही है। केंद्र सरकार ने लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) संशोधन आदेश, 2025 के तहत सभी राशन कार्ड धारकों के लिए हर पांच वर्ष में ई-केवाईसी अनिवार्य किया है। यह आदेश 22 जुलाई 2025 से लागू हुआ था।

योजना के विस्तार की तैयारी

सीबीडीसी आधारित खाद्य सब्सिडी पायलट योजना को गुजरात और पुडुचेरी से आगे बढ़ाकर जून 2026 तक चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने की योजना है। इस योजना के लिए डिजिटल कूपन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तैयार किए जाते हैं। इससे खाद्य सब्सिडी वितरण को अधिक सुरक्षित और डिजिटल रूप से नियंत्रित बनाया जा सकेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

” प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी खाद्य सुरक्षा योजना है। ” उचित मूल्य दुकानें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत रियायती खाद्यान्न वितरित करती हैं। ” कॉमन सर्विस सेंटर ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर डिजिटल सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करते हैं। ” केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी क्रिप्टोकरेंसी से अलग होती है क्योंकि इसे केंद्रीय बैंक जारी करता है। पुडुचेरी में ई₹ आधारित खाद्य सब्सिडी व्यवस्था भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ लाभार्थियों तक सब्सिडी पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनने की उम्मीद है।

Originally written on May 11, 2026 and last modified on May 11, 2026.

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